छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय महाविद्यालयों में गेस्ट लेक्चरर की नियुक्ति से जुड़ी गेस्ट लेक्चरर नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नीति को स्वीकृति दी गई। नई नीति में गेस्ट लेक्चररों के चयन, अनुभव के अंक, समान अंक की स्थिति में प्राथमिकता और मानदेय से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया गया है।
चयन प्रक्रिया में अनुभव को मिलेगा महत्व
नई नीति में गेस्ट लेक्चरर के पूर्व अनुभव को भी चयन प्रक्रिया में महत्व दिया गया है। यानी उम्मीदवारों के चयन के दौरान उनकी शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ संबंधित क्षेत्र में उनके अनुभव को भी ध्यान में रखा जाएगा।
समान अंक होने पर प्राथमिकता के नियम तय
नीति में दो उम्मीदवारों के समान अंक आने की स्थिति में किसे प्राथमिकता दी जाएगी, इसे लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और किसी तरह की असमंजस की स्थिति को दूर करने में मदद मिलेगी।
मानदेय के नियम भी स्पष्ट
कैबिनेट ने गेस्ट लेक्चररों को दिए जाने वाले मानदेय से जुड़े प्रावधानों को भी नीति में स्पष्ट किया है। इससे शासकीय महाविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति और भुगतान की प्रक्रिया को एक निर्धारित व्यवस्था के तहत संचालित किया जा सकेगा।
बराबर अंक होने पर छत्तीसगढ़ के कैंडीडटेस को प्राथमिकता
नई नीति के अनुसार अगर एक ही कैटेगारी के दो कैंडीडटेस के मेरिट अंक बराबर रहते हैं, तो ऐसे मामले में छत्तीसगढ़ के मूल निवासी कैंडीडटेस को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका मतलब है कि समान अंक होने की स्थिति में निवास संबंधी नियम के आधार पर चयन किया जाएगा।
सरकारी कॉलेज और यूनिवर्सिटी का अनुभव भी जुड़ेगा
गेस्ट लेक्चरर के चयन में अब शिक्षण अनुभव (Teaching Experience) को भी महत्व दिया जाएगा। सरकारी कॉलेज और राज्य विश्वविद्यालय में पढ़ाने के अनुभव को चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है। किसी राज्य विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र के दौरान कम से कम 5 महीने काम करने पर 5 अंक दिए जाएंगे। अनुभव के लिए अधिकतम 30 अंक निर्धारित किए गए हैं। यानी अलग-अलग संस्थानों में लंबे समय तक पढ़ाने वाले गेस्ट लेक्चरर को चयन के दौरान उनके अनुभव का लाभ मिल सकेगा।
जिन गेस्ट लेक्चरर की सेवाएं प्रभावित हुईं, उन्हें भी मौका
नई नीति में उन गेस्ट लेक्चरर (Guest Lecturer Policy 2026) के लिए भी प्रावधान किया गया है, जिनकी सेवाएं सरकारी कॉलेज या राज्य विश्वविद्यालय में किसी कारण से प्रभावित हुई हैं। ऐसे गेस्ट लेक्चरर को उपलब्ध रिक्त पदों के विरुद्ध दोबारा नियुक्ति का अवसर दिया जा सकेगा। इससे पहले काम कर चुके गेस्ट लेक्चरर को उपलब्ध पदों के अनुसार फिर से काम करने का मौका मिल सकेगा।
पीरियड के बजाय काम किए दिनों के आधार पर मानदेय
नई नीति में गेस्ट लेक्चरर (Guest Lecturer Policy 2026) के मानदेय (Honorarium) से जुड़ा नियम भी बदला गया है। अब मानदेय की गणना काम किए गए दिनों के आधार पर की जाएगी। इसके साथ ही गेस्ट लेक्चरर की जिम्मेदारियों, नियुक्ति की अवधि और आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) से जुड़े नियमों को भी स्पष्ट किया गया है।
एक नजर में समझें नई गेस्ट लेक्चरर नीति
समान मेरिट अंक होने पर छत्तीसगढ़ के कैंडीडटेस को प्राथमिकता।
सरकारी कॉलेज और राज्य विश्वविद्यालय का शिक्षण अनुभव माना जाएगा।
राज्य विश्वविद्यालय में 5 महीने के अनुभव पर 5 अंक।
अनुभव के लिए अधिकतम 30 अंक मिलेंगे।
प्रभावित गेस्ट लेक्चरर को रिक्त पदों पर दोबारा नियुक्ति का अवसर।
मानदेय की गणना काम किए गए दिनों के आधार पर होगी।
नियुक्ति की अवधि, जिम्मेदारियों और अवकाश के नियम स्पष्ट किए गए हैं।
गेस्ट लेक्चरर के लिए क्या बदला?
कैबिनेट (CG Cabinet Decision) के फैसले के बाद गेस्ट लेक्चरर (Guest Lecturer Policy 2026) की चयन प्रक्रिया में मेरिट, छत्तीसगढ़ निवास और शिक्षण अनुभव को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। खास तौर पर समान अंक होने पर छत्तीसगढ़ के कैंडीडटेस को प्राथमिकता और अनुभव के लिए अधिकतम 30 अंक का प्रावधान महत्वपूर्ण है। वहीं, मानदेय की गणना और नियुक्ति से जुड़े नियमों को स्पष्ट करने से व्यवस्था में एकरूपता लाने का प्रयास किया गया है।


















