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बस्तर के जंगलों में बढ़ेगी बाघों की सुरक्षा, स्पेशल फोर्स संभालेगी मोर्चा

जगदलपुर। बस्तर के घने जंगलों में अब नक्सल विरोधी अभियानों के साथ वन्यजीव संरक्षण पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। बस्तर के इतिहास में पहली बार मैदानी वन अमले को बाघ संरक्षण के लिए प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से संभाग स्तरीय ‘टाइगर प्रोटेक्शन वर्कशॉप’ का आयोजन किया जा रहा है।

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जगदलपुर स्थित वन विद्यालय में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य वन अमले को बाघों की निगरानी, सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी देना है। साथ ही बस्तर के जंगलों में संभावित टाइगर कॉरिडोर को मजबूत करने की दिशा में भी रणनीति तैयार की जा रही है।

वन अमले को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण

कार्यशाला को महज नियमित प्रशिक्षण के बजाय बस्तर में बाघ संरक्षण की व्यापक रणनीति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसमें मैदानी अमले को बाघों की मौजूदगी की निगरानी, उनके आवास की सुरक्षा और टाइगर कॉरिडोर को सुरक्षित रखने से जुड़े पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

‘गोलियों की गूंज’ से ‘Pugmark की ट्रैकिंग’ तक का सफर

बस्तर के जंगलों में पिछले कुछ सालों में बाघों की मूवमेंट और उनकी वापसी के संकेत मिले हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या मैदानी स्तर का अमला (फॉरस्ट गार्ड और रेंकर्स) इन मेहमानों की सुरक्षा और मॉनिटरिंग के लिए तैयार है? इसी चुनौती को भांपते हुए इस कार्यशाला में सिर्फ कागजी ज्ञान नहीं, बल्कि ग्राउंड-जीरो वॉरफेयर की तर्ज पर ‘वाइल्डलाइफ इंटेलिजेंस’ और ट्रैकिंग सिखाई जा रही है. (Bastar Tiger Protection Special Force)

ट्रेनिंग की खास बातें

वर्कशॉप में कर्मचारियों को सिर्फ पगमार्क देखना ही नहीं, बल्कि एक ‘शिकारी’ की नजर से यह पहचानना सिखाया जा रहा है कि पगमार्क नर बाघ का है या मादा का, और उसकी उम्र क्या है. अक्सर मैदानी अमला पगमार्क में धोखा खा जाता है. इसे दूर करने के लिए लेपर्ड और टाइगर के ‘फिल्ड साइन्स’ और स्क्रैच मार्क्स में बारीक अंतर की क्लास ली गई. आधुनिक कैमरा ट्रैप तकनीक के साथ-साथ जंगलों में मजबूत मुखबिर तंत्र (Informant Network) तैयार करने पर जोर दिया गया है, ताकि वन्यजीव तस्करों और शिकारियों पर नकेल कसी जा सके.  पहले दिन क्लासरूम में थ्योरी और परीक्षा के बाद, अब दूसरे दिन (3 अक्टूबर) पूरा अमला सीधे बस्तर के जंगलों में उतरकर लाइव ट्रैकिंग और प्रैक्टिकल एक्सरसाइज करेगा.

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