शारदीय नवरात्र इस साल 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं। नौ दिनों तक नवरात्र में माता की पूजा की जाती है। प्रतिपदा के दिन लोग कलश स्थापना करेंगे, लेकिन इस साल शारदीय नवरात्र नौ नहीं, दस दिन के होंगे। इस साल अष्टमी तिथि की वृद्धि हो रही है। पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि नवरात्र की सप्तमी तिथि का मान 17 अक्तूबर को होगा। जो सूर्योदय के पहले से लेकर रात में 5:53 तक व्याप्त रहेगी। इस दिन पूजा पंडालों में देवी की मूर्तियों की स्थापना की जाएगी। इस बार माता हाथी पर सवार होकर आ रही है, इसे अच्छा संकेत माना जा रहा है, लेकिन माता का गमन मूर्ग पर होगा,इसे अशांति के तौर पर माना जाता है। इस दिन लोगों में अशांति व्याप्त रहेगी। वहीं नवमी तिथि 20 अक्तूबर को भी सुबह नवमी तिथि मिल रही है, इसके बाद व्रत का पारण किया जाएगा। दोपहर में श्रवण नक्षत्र युक्त दशमी होने के कारण इसी दिन 20 अक्तूबर को विजयादशमी भी मनाई जाएगी। इस कारण नवरात्र दस दिनों का माना जा रहा है।
कितने दिन के होंगे नवरात्र
मां भगवती की आराधना और पूजन-अर्चन का पर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर को प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होगा। बीस अक्तूबर को विजयादशमी का महापर्व मनाया जाएगा। उत्थान ज्योतिष एवं आध्यात्म संस्थान के निदेशक पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि इस नवरात्र में अष्टमी तिथि की वृद्धि हो जाने की वजह से नवरात्र दस दिनों का होगा। इस साल अष्टमी तिथि दो दिन मनाई जाएगा। महाअष्टमी का व्रत 18 अक्तूबर को किया जाएगा और निशा पूजा भी की जाएगी। अष्टमी तिथि के व्रत का पारण 19 अक्तूबर को सुबह 7:55 बजे के बाद किया जाएगा।
कब है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
निदेशक ने बताया कि प्रतिपदा तिथि सूर्योदय से लेकर रात में 8:37 बजे तक व्याप्त रहेगी। कलश स्थापना का शुभ अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा। आपको बता दें कि इस दिन चित्रा नक्षत्र रहेगा, इस नक्षत्र में कलश स्थापना करना निषेध माना गया है, इसलिए इस नक्षत्र में कलश स्थापना नहीं की जाएगी। आप अभीजित मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं। इस दिन मां भगवती के पहले स्वरूप माता शैलपुत्री का पूजन-अर्चन किया जाएगा। नवमी तिथि में कन्या पूजन 19 अक्तूबर को 7:55 बजे के बाद से लेकर 20 अक्तूबर को सुबह 9:35 बजे से पहले करेंगे। नवरात्र के नौवें दिन का व्रत 20 अक्तूबर सुबह 9:35 बजे तक व्याप्त होने की वजह से किया जाएगा। इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी।


















