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SIR के बाद अब 17 राज्यों में SSR की तैयारी, चुनाव आयोग ने जारी किया शेड्यूल

चुनाव आयोग 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसएसआर कराने जा रहा है। एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचन आयोग ने अब मतदाता सूचियों के वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) कराने का आदेश दिया है। जिन राज्यों में एसएसआर कराया जाएगा, उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर शामिल हैं। इन राज्यों में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा 1 जनवरी तक असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुदुचेरी, राजस्तान तमिलनाडु में भी एसएसआर होना है।

जान लीजिए जरूरी तारीखें

चुनाव आयोग ने कहा है कि 2 नवंबर तक पोलिंग बूथ का पुनर्संयोजन पूरा हो जाएगा।इसके बाद 12 अक्टूबर को एकीकृत मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी। 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक लोग आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। इसके लिए 28 दिसंबर तक का समय होगा। 4 जनवरी को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश कर दी जाएगी।

विपक्षी दलों की क्या है मांग

इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अंतिम मतदाता सूची चार जनवरी को प्रकाशित की जाएगी। मशीन द्वारा पढ़े जाने योग्य मतदाता सूची की उपलब्धता विपक्षी दलों की एक प्रमुख मांग रही है। हालांकि, आंकड़ों में हेरफेर की आशंकाओं और अदालती आदेशों का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग (ईसी) ने फिलहाल के लिए इस मांग को खारिज कर दिया है। एक अहम बदलाव के तहत, ईसी राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियों की ‘सॉफ्ट कॉपी’ उपलब्ध कराएगा। अब मसौदा और अंतिम मतदाता सूचियां (बिना फोटो के) ‘इमेज पीडीएफ’ के बजाय ‘पढ़ने योग्य पीडीएफ प्रारूप’ में दी जाएंगी।

मसौदा चरण में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से संबंधित पूरक दस्तावेज मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ साझा किए जाएंगे। इन 17 राज्यों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है। वहीं, असम में कानूनी कारणों से एसआईआर के बजाय विशेष पुनरीक्षण कराया गया। मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं, खासकर युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों के नाम मतदाता सूची में शामिल करना, इसकी प्रविष्टियों में सुधार करना और इसमें संशोधन को और बेहतर बनाना है।

जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसएसआर कराया जाएगा, उनमें अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। वहीं, इस फैसले को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा।

कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा, ”ज्ञानू, (मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार) भाई, इतना काफी नहीं है। आपको इस्तीफा दे देना चाहिए और सरकारी गवाह बन जाना चाहिए। मोदी-शाह के निर्देशों पर आपने जो नुकसान किया है, उसकी भरपाई अब अधिसूचना के जरिये यू-टर्न लेने से नहीं होगी।”

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ”हम 2025 से ही मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूचियों की मांग कर रहे हैं। पारदर्शिता एक न्यूनतम आवश्यकता है, यह कोई ऐसी चीज नहीं है जो आपको पिछले अपराधों से मुक्त कर दे।” वेणुगोपाल ने कहा, “आपको पद से हट जाना चाहिए और चुनावी प्रक्रिया में व्यापक सुधार होना चाहिए, जिसकी शुरुआत संदेहास्पद एसआईआर को वापस लेने और ईसी की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव के साथ होनी चाहिए।” उन्होंने कहा, “यह बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम है।”

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