छत्तीसगढ़ में सड़कों की बदहाली और निर्माण कार्यों में देरी को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और बिलासपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि सड़कों का निर्माण और रखरखाव संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है, कोर्ट की नहीं।
विभाग कोर्ट के आदेश का इंतजार क्यों करते हैं?
सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि संबंधित विभागों को अपने स्तर पर सड़कों की स्थिति सुधारने और रखरखाव के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। इसके बजाय विभाग अदालत के आदेश का इंतजार करते हैं, जो उचित कार्यप्रणाली नहीं है।
कोर्ट की टिप्पणी सड़कों की खराब स्थिति और निर्माण कार्यों में हो रही देरी को लेकर संबंधित विभागों की जवाबदेही पर केंद्रित रही। अदालत ने साफ किया कि बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को पूरा करना प्रशासनिक विभागों का दायित्व है।
सड़क से संबंधित जनहित याचिकाओं पर पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की स्थिति, सेंदरी-मोपका बायपास को एनएचएआई को सौंपने में देरी और बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना की प्रगति पर सवाल उठाए. रायपुर के धनेली-विधानसभा मार्ग को लेकर 8 अप्रैल 2025 के आदेश के पालन की जानकारी भी मुख्य सचिव से मांगी गई थी. बुधवार को राज्य सरकार, एनएचएआई और नगर निगम की तरफ से शपथ पत्र पेश किया गया. (Bilaspur High Court News)
पांच साल से सुनवाई, सड़कों की हालत में सुधार नहीं
बता दें कि हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि प्रदेश की सड़कों की स्थिति को लेकर वर्ष 2021 से जनहित याचिका लंबित है. इसके साथ दो अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई हो रही है. 7 अक्टूबर 2026 को हाई कोर्ट ने कहा था कि इतने वर्षों बाद भी प्रदेश की सड़कों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है. बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है. पिछली सुनवाई में नगर निगम की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ था. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए निगम आयुक्त को अगली तारीख पर स्वयं उपस्थित होने या निगम का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था. बुधवार को निगम के अधिवक्ता उपस्थित हुए और मरम्मत कार्यों की रिपोर्ट पेश की.
आज ही मिले बायपास हैंडओवर के दस्तावेज: एनएचएआई
सेंदरी-मोपका बायपास को लेकर एनएचएआई ने पहले बताया था कि इसका संचालन और मेंटेनेंस लोक निर्माण विभाग के बिलासपुर संभाग क्रमांक-1 के पास है, जबकि पीडब्ल्यूडी ने हैंडओवर करने की जानकारी दी थी. बुधवार को एनएचएआई ने बताया कि बायपास को हैंडओवर करने से संबंधित दस्तावेज पीडब्ल्यूडी ने उसी दिन सौंपे हैं.
31 अक्टूबर तक भरेंगे बिलासपुर-रायपुर सड़क के गड्ढे
एनएचएआई ने हाई कोर्ट को बताया कि बिलासपुर-रायपुर सड़क के गड्ढे 31 अक्टूबर तक भर दिए जाएंगे, जबकि बड़े काम दिसंबर तक पूरे होंगे. नगर निगम ने बताया कि शहर में गड्ढे भरने का काम लगातार जारी है और अब डामरीकरण शुरू किया जाएगा. मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत स्वीकृत नई सड़कों का काम भी शुरू होगा. डामर की कीमतें बढ़ने से काम प्रभावित होने की जानकारी पर राज्य सरकार ने दो-तीन दिन में निर्णय लेने की बात कही. (Bilaspur High Court News)
नगर निगम की तरफ से प्रस्तुत की गई 78 पेज की रिपोर्ट
नगर निगम ने शहर की खराब सड़कों की मरम्मत के लिए अलग-अलग जोन में पेचवर्क कराया है. बुधवार को हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में मंगला चौक से आजाद चौक पहुंच मार्ग, कांतिपारा, एसईसीएल मुख्य मार्ग, शनिचरी बाजार, व्यापार विहार, यदुनंदन नगर और सिरगिट्टी सहित कई क्षेत्रों में मरम्मत की जानकारी दी गई. रिपोर्ट में काम से पहले और बाद की तस्वीरें भी शामिल हैं.
मुख्य मार्गों से कॉलोनियों तक मरम्मत
जोन क्रमांक-1 में मंगला चौक से आजाद चौक पहुंच मार्ग, कांतिपारा, एसईसीएल मुख्य मार्ग और शनिचरी बाजार में काम कराया गया. जोन क्रमांक-2 की रिपोर्ट में शिवा चौक जन स्वास्थ्य केंद्र, विष्णु चौक और रायपुर रोड शामिल हैं. जोन क्रमांक-3 में विजय वंदना हॉस्पिटल से उसलापुर ओवरब्रिज तक, गौरव पथ और शिवनाथ मार्ग पर मरम्मत का उल्लेख है.
जोन क्रमांक-6 में वार्ड 39, 41, 42, 43, 44 और 45 सहित विभिन्न क्षेत्रों तथा जोन क्रमांक-7 में भवानी चौक सहित अन्य स्थानों पर पेचवर्क की जानकारी दी गई. निगम ने तस्वीरों के जरिए गड्ढे भरने और सड़क की उखड़ी सतह सुधारने के काम का ब्योरा पेश किया.


















