छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे और भटके हुए नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को कई तरह की सुविधाएं और आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के बाद भी इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।
लेकिन अब पुनर्वास योजना को लेकर एक नया मामला सामने आया है। पुनर्वासित नक्सलियों ने जिला प्रशासन के नाम पत्र लिखकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पत्र के सामने आने के बाद नक्सलियों के पुनर्वास और उन्हें दी जा रही सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पुनर्वासित नक्सलियों ने प्रशासन को लिखा पत्र
सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए आवास, आर्थिक सहायता, रोजगार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीने का अवसर देना है।
हालांकि, पुनर्वासित नक्सलियों की ओर से जिला प्रशासन को लिखे गए पत्र में सरकारी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की गई है। उन्होंने अपनी समस्याओं और सरकार की ओर से किए जा रहे दावों के बीच अंतर होने का आरोप लगाया है।

पूर्व नक्सलियों का क्या आरोप है?
पुनर्वासित नक्सलियों ने 16 बिंदुओं का मांग पत्र लिखा है. जिसमें उन्होंने बताया कि, पुनर्वासित नक्सलियों से किए वादों को पूरा करने में सरकार ने देरी की है. पूर्व नक्सलियों ने पत्र में सरकारी नौकरी या रोजगार न मिलने की स्थिति में पुनर्वास नीति के तहत 15 लाख रुपये देने का प्रावधान की भी बात की. वहीं, उन्होंने मांग की कि, जेल में बंद नक्सलियों और समर्थकों को जल्द से जल्द पुनर्वास केंद्रों में रखा जाए.

पूर्व नक्सलियों ने पत्र में इनाम भुगतान न होने की भी बात कही. एसी सचिव इनाम 08 लाख के भुगतान पर 05 लाख और डीवीसी सचिव का इनाम 10 लाख के भुगतान पर 08 लाख देने की मांग की गई है. पूर्व नक्सलियों ने लंबित मांगो को लेकर यह पत्र पुनर्वास केंद्र से कलेक्टर को लिखा है. पूर्व नक्सलियों का कहना है कि, शांति की राह चुनने के बाद अब पुनर्वासित नक्सलियों को सम्मानजनक जिंदगी और सरकारी सहायता का इंतजार है. पूरा मामला भानुप्रतापपुर ब्लाक के चौगेल पुनर्वासित केंद्र का बताया जा रहा है.
आत्मसमर्पित नक्सलियों को क्या-क्या सुविधा दी जाती है?
बताते चलें आत्मसमर्पण करने वाले सभी कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार एवं रोजगार से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है.ताकि वे सम्मानपूर्वक समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन प्रारंभ कर सकें.

















