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रायपुर में किसानों की ‘अन्नदाता गर्जना रैली’, 10 सूत्री मांगों को लेकर महानदी भवन का करेंगे घेराव

रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर राजधानी रायपुर में भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ आयोजित की जा रही है। धान बोनस के बकाया भुगतान, धान की खरीदी 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने और किसानों की अन्य समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर प्रदेशभर के किसान रैली में शामिल होने के लिए एकत्र हुए हैं।

किसानों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर नया रायपुर स्थित महानदी भवन का घेराव करने का ऐलान किया है। इस प्रदर्शन के जरिए किसान सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

धान बोनस और समर्थन मूल्य को लेकर प्रमुख मांग

भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में हो रही इस रैली में धान बोनस के बकाया भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा रहा है। किसानों की मांग है कि लंबित बोनस राशि का भुगतान जल्द किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।

इसके अलावा, किसान धान की खरीदी 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि लागत में बढ़ोतरी को देखते हुए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए।

10 सूत्री मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

किसानों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए 10 सूत्री मांगपत्र तैयार किया है। इसमें धान बोनस के बकाया भुगतान और धान खरीदी की दर के साथ किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों को शामिल किया गया है।

रैली में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से किसानों के शामिल होने की बात कही गई है। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना और उनके निराकरण के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बनाना है।

भारतीय किसान संघ की प्रमुख मांगों में वर्ष 2022-23 की धान खरीदी का बकाया 1700 करोड़ रुपये का भुगतान, तीन वर्षों की 258 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य वृद्धि का लाभ देते हुए 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी तथा फल एवं सब्जी उत्पादक किसानों को कृषक उन्नति योजना से जोड़ना शामिल है. संघ का कहना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए और लंबित भुगतान का तत्काल निराकरण किया जाना चाहिए.

धान खरीदी की अवधि बढ़ाने की मांग

किसान संघ ने धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निर्धारित करने की मांग की है. साथ ही प्रत्येक तौल में अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम धान लेने के संबंध में शासनादेश जारी करने की मांग रखी है. संघ ने बड़े किसानों को पांच, लघु किसानों को तीन और सीमांत किसानों को दो टोकन देने तथा किसानों पर दबाव डालकर बैंक खाते समर्पित कराने की प्रक्रिया बंद करने की मांग भी की है.

गौ संरक्षण से लेकर सिंचाई परियोजनाओं तक की मांग

संघ की मांग है कि गौवंदन योजना लागू की जाए और जी-राम-जी योजना को गौ संरक्षण एवं संवर्धन से जोड़ा जाए. इसके अलावा अरपा-भैंसाझार सहित अधूरी सिंचाई परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाने तथा पैरी हाईडैम जैसी नई परियोजनाओं को तत्काल स्वीकृति देने की मांग की गई है.

फसल नुकसान और खाद की कीमतों का मुद्दा

बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई है. इसके साथ ही निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही गई है.

भूमि अधिग्रहण और वैकल्पिक फसलों पर जोर

भारतीय किसान संघ ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में भारतीय एग्रो इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के उदयपुर घोषणा-पत्र के अनुरूप कार्य करने की मांग की है. जल संरक्षण और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए मक्का एवं गेहूं की खरीदी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने की मांग रखी गई है. संघ का कहना है कि इन उपायों से किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है.

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