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छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को बड़ी राहत: पुरानी पेंशन का रास्ता साफ, हाई कोर्ट ने सरकार की याचिका खारिज की

बिलासपुर के एलबी संवर्ग के हजारों शिक्षकों को पेंशन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। अब शिक्षाकर्मी के तौर पर की गई पुरानी सेवा को भी पेंशन के लिए गिना जाएगा प्रदेश के विभिन्न जिलों से कुल 2014 शिक्षकों ने याचिका लगाई थी। इसमें कोरिया के राजेंद्र प्रसाद पटेल सहित सुकमा, कांकेर, कोंडागांव और धमतरी के शिक्षक शामिल थे।

इन सभी ने याचिका में मांग की थी कि पेंशन के लिए जरूरी 10 साल की ‘क्वालीफाइंग सर्विस’ में उनकी पुरानी सेवा को भी जोड़ा जाए। तर्क दिया था कि कई शिक्षक रिटायर होने वाले हैं। अगर केवल 2018 के बाद की सेवा गिनी जाएगी तो उनकी नौकरी के 10 साल पूरे नहीं होते और वे पेंशन के हकदार नहीं रह जाते। सिंगल बेंच ने याचिका मंजूर करते हुए राज्य सरकार को 120 दिनों में स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी।

राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि शिक्षकों का संविलियन 1 जुलाई 2018 को हुआ है, इसलिए पेंशन के लिए केवल इसके बाद की सेवा अवधि को ही आधार माना जाए। लेकिन डिवीजन बेंच ने कहा कि जब संविलियन के लिए पूर्व की सेवा की गणना को माना गया तो पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने में बाधा नहीं होनी चाहिए। हाई कोर्ट राज्य सरकार को 120 दिनों के भीतर नीतिगत निर्णय लेने का आदेश दिया है। सरकार को अब यह तय करना होगा कि शिक्षाकर्मियों की पिछली सेवा को पेंशन के दायरे में कैसे और कितना शामिल किया जाए।

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