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राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा,‘चढ़ावा चोरी’ विवाद के बीच सामने आई खबर

अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में एफआईआर के बाद राम मंदिर तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार दोनों के साथ ही गोपाल ने भी इस्तीफा दिया है। हालांकि इस्तीफे पर अभी कोई कुछ बोल नहीं रहा है। इस्तीफे पर कोई अधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। दरअसल, ट्रस्ट के द्वारा कराई गई एफआईआर के बाद 8 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों बड़ी मछलियों को बचाने और बचकर निकलने का आरोप लगा रहे थे।

आपको बता दें कि गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में बृहस्पतिवार को रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों और कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है।इसके बाद सभी नामजद आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और पुलिस मामले के संबंध में उनसे पूछताछ कर रही है।

एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में उठाए थे सवाल

इससे पहले प्रारंभिक रिपोर्ट में एसआईटी ने ट्रस्ट और पदाधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया। खरीदारी, निर्माण, दानपात्र की रकम, आभूषण, रत्न तथा चढ़ावा सामग्री की गणना के तरीकों और भौतिक आडिट पर सवाल उठाए गए हैं। विस्तृत जांच में एसआईटी हर एक आरोप के संबंध में पता लगाएगी कि कितना सही है और कितना झूठ। दानपात्र की गणना व्यवस्था की जानकारी पहले हो चुकी है। अब सीसीटीवी फुटेज से दानपात्र खोलने, गणना कक्ष तक लाने तथा गणना के दौरान की स्थिति का आकलन करने की कोशिश करेगी। जब तक कोई फुटेज का चश्मदीद नहीं मिल जाता तब तक आरोपों को साबित करना मुश्किल होगा।

इसी तरह निर्माण सामग्री की खरीद के बिल बाउचर भी चेक करेगी। भुगतान के तरीके का पता लगाएगी। संदेह होने पर बिल बाउचर, भुगतान और बाजार में उसी वस्तु के रेट के बारे में भी पता लगाया जा सकता है। खरीद के नाम पर ज्यादा भुगतान के आरोप की भी तस्दीक की जाएगी। जरूरी हुआ तो निर्माण सामग्री सप्लाई करने वाले एजेंसी से भी रिकार्ड मांगे जाएंगे। आरोपों के दस्तावेज उपलब्ध हो गए तो ट्रस्ट कर्मचारियों और पदाधिकारियों की भूमिका भी तय होगी।

योगी पहले ही कह चुके हैं एसआईटी जांच में दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा

श्रीराम मंदिर की व्यवस्था और चढ़ावे की चोरी की जांच एसआईटी कर रही है। जांच पर पीएमओ से लेकर सीएमओ तक नजर है। मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि एसआईटी जांच में दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। श्रीराम मंदिर लोगों की आस्था का विषय होने के नाते शासन भी चाहता है कि जांच में कोई तथ्य छूटने न पाए।

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