केंद्र सरकार देश में फ्लेक्स-फ्यूल और एथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए इस साल के आखिर तक 500 और दिसंबर 2027 तक 5,000 फ्लेक्स-फ्यूल स्टेशन खोलने की योजना बना रही है. सरकार E85 फ्यूल को सामान्य पेट्रोल से सस्ता बनाने पर भी काम कर रही है. इसका मकसद तेल आयात कम करना, प्रदूषण घटाना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाना है.

भारत में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार अब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और एथेनॉल मिक्स फ्यूल को तेजी से बढ़ावा देने की तैयारी में है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को बताया कि सरकार इस साल के आखिर तक देश में करीब 500 फ्लेक्स-फ्यूल स्टेशन शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. इसके बाद दिसंबर 2027 तक इनकी संख्या बढ़ाकर लगभग 5,000 करने की योजना है.
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मंत्री ने कहा कि पहले भी E100 (100 प्रतिशत एथेनॉल) फ्यूल स्टेशन शुरू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन उस समय बाजार में उपयुक्त वाहन उपलब्ध नहीं थे. अब स्थिति बदल चुकी है और कई वाहन निर्माता कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहन लॉन्च कर रही हैं. इसी वजह से सरकार अब बड़े स्तर पर फ्लेक्स-फ्यूल स्टेशन स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
इन शहरों में शुरू होंगे फ्लेक्स-फ्यूल स्टेशन
शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर, पुणे, मुंबई और नागपुर जैसे शहरों में 50 से 100 फ्लेक्स-फ्यूल स्टेशन खोले जाएंगे. इसके बाद इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी. सरकार का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है तो 2027 के अंत तक देशभर में 5,000 फ्लेक्स-फ्यूल स्टेशन संचालित हो सकते हैं.
पेट्रोल से सस्ता रखने की कोशिश
भारत पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिक्स (E20) का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर चुका है. अब सरकार E85 जैसे ज्यादा एथेनॉल वाले फ्लेक्स फ्यूल को बढ़ावा देना चाहती है. E85 में 85 प्रतिशत तक एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है. सरकार का मकसद E85 को आम पेट्रोल की तुलना में सस्ता बनाना है ताकि लोग तेजी से इसे अपनाएं. इसके लिए नीतिगत सहायता और अन्य प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं.
नितिन गडकरी ने दिया बड़ा बयान
इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल को बढ़ावा देने का मकसद केवल प्रदूषण कम करना नहीं है, बल्कि देश के तेल आयात बिल को भी घटाना है. उन्होंने बताया कि भारत हर साल करीब 22 से 23 लाख करोड़ रुपये का फॉसिल फ्यूल के आयात पर खर्च करता है. अगर देश को वास्तव में आत्मनिर्भर बनना है तो आयातित तेल पर निर्भरता कम करनी होगी और घरेलू स्तर पर तैयार ईंधन का उपयोग बढ़ाना होगा.



















