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बस्तर में बाढ़ का खतरा! ओडिशा ने डैम से छोड़ा 162 करोड़ लीटर पानी

बस्तर में भारी बारिश के बाद इंद्रावती नदी का जलस्तर अभी पूरी तरह सामान्य भी नहीं हुआ था कि एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, ओडिशा की ओर से नबरंगपुर डैम से इंद्रावती नदी में करीब 162 करोड़ लीटर (1.62 अरब लीटर) पानी छोड़ा गया है। इससे नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

हाल ही में चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से हुई मूसलाधार बारिश के कारण इंद्रावती नदी उफान पर आ गई थी। बस्तर में नदी ने करीब 53 साल का रिकॉर्ड भी तोड़ा था। लगातार बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर के कारण जिले के कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी थी। अब डैम से पानी छोड़े जाने के बाद नदी के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता फिर बढ़ गई है। प्रशासन को जलस्तर पर नजर रखने और निचले इलाकों में संभावित स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।

रेड अलर्ट जारी

प्रशासन ने इलाके आस-पास के इलाके में रेड अलर्ट जारी कर दिया है. यह पानी मंगलवार देर रात 2 बजे के आसपास बस्तर पहुंचेगा. बता दें कि, डैम से 18 घंटे में 1.62 अरब लीटर पानी बस्तर की ओर धकेला गया है. वहीं, बस्तर में खतरा फिर बढ़ने वाला है. केंद्रीय जल बोर्ड के मुताबिक, ओडिशा के नबरंगपुर डैम से रविवार रात 1 बजे से सोमवार शाम 6 बजे तक 250 क्यूमेक, यानी हर सेकेंड 2.50 लाख लीटर पानी बहाया गया. इसी तरह 18 घंटे में लगातार 162 करोड़ लीटर पानी बहाया जा चुका है.

सीएम कर चुके हैं मुलाकात

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को बस्तर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया. मुख्यमंत्री जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र के डोंगाघाट पहुंचे और बाढ़ से प्रभावित परिवारों से आत्मीयतापूर्वक मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. उन्होंने प्रभावित लोगों को आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से खड़ी है तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

मुख्यमंत्री श्री साय ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए शासन के प्रावधानों के तहत मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त प्रत्येक प्रभावित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹10-10 हजार की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से हुई क्षति का सर्वे और आकलन तेजी से पूरा कर पात्र परिवारों तक शासन की सहायता शीघ्र पहुंचाई जाए.

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