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किस देवी-देवता के लिए कितनी बाती का दीपक लगाएं ,जानिए क्या है धार्मिक मान्यता

सनातन धर्म में प्रत्येक शुभ कार्य चाहे वह पूजा-पाठ, सांस्कृतिक उत्सव या कोई भी त्योहार क्यों न हो, सभी की शुरुआत दीप प्रज्वलित करने से ही होती है. मान्यता है कि अग्निदेव को साक्षी मानकर उसकी मौजूदगी में किए गए कार्य अवश्य सफल होते हैं.

दीपक में लगाई जाने वाली बत्तियों से देवी-देवताओं का संबंध होता है. आइए जानते हैं कि किस देवी-देवता के लिए दीपक में कितनी बाती लगाएं.

एक मुखी दीपक

इस दीपक का प्रयोग अपने इष्ट देव की पूजा के लिए किया जाता है. इसमें एक बत्ती का प्रयोग करते हैं. इसमें गाय का घी या तिल के तेल का उपयोग करते हैं. आरती के लिए भी इस दीपक का उपयोग होता है.

दो मुखी दीपक

देवी दुर्गा की आराधना करते समय या शिक्षा में सफलता के लिए मां सरस्वती के समक्ष दो बत्ती वाला दीपक जलाना चाहिए.

तीन मुखी दीपक

विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा में तीन बत्ती वाले दीपक का प्रयोग करना चाहिए, इससे गणेश जी प्रसन्न होते हैं.

चौमुखी दीपक

भैरव देवता को प्रसन्न करने के लिए चार बत्ती वाला दीपक जलाना चाहिए,ऐसा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं.

पंचमुखी दीपक

शिव पुत्र भगवान कार्तिकेय की पूजा के लिए पांच बत्ती वाले दीपक का उपयोग किया जाता है, इससे कोर्ट केस आदि में विजय मिलती है शत्रु पराजित होते हैं.

सात मुखी दीपक

धन, संपदा और वैभव की देवी माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के सात बत्तियों वाले दीपक का उपयोग करना चाहिए. मान्यता है कि माता लक्ष्मी की पूजा में सात मुखी दीपक जलाने से घर में अन्न-धन की कमी नहीं होती.

आठ मुखी या बारह मुखी दीपक

देवों के देव महोदव को प्रसन्न करने के लिए 8 बत्ती या 12 बत्ती वाले दीपक का उपयोग काना बहुत लाभकारी होता है.

सोलह मुखी दीपक

जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा में 16 मुखी यानी 16 बत्तियों वाला दीपक जलाया जाता है,ऐसा करने से श्री हरि शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं.

घी का दीपक

सुख-समृद्धि के लिए गाय के घी का दीपक जलाया जाता है. इस दीपक को आप प्रत्येक दिन जला सकते हैं. किसी भी देवी देवता की पूजा में घी का दीपक प्रज्वलित किया जा सकता है.

तिल के तेल का दीपक

धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि देव की पूजा में इस दीपक को जलाया जाता है. यद्धपि आप तिल के तेल का उपयोग अन्य देवी देवाताओं की पूजा में भी कर सकते हैं.

सरसों के तेल का दीपक

सूर्य देव,शनिदेव,मां काली और काल भैरव की पूजा में इस दीपक का उपयोग किया जाता है.

चमेली के तेल का दीपक

श्रीराम भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए चमेली के तेल वाला दीपक जलाया जाता है.

विषम संख्या में दीपक

दीपक जलाने के बारे में कहा जाता है कि सम संख्या में जलाने से ऊर्जा का संवहन निष्क्रिय हो जाता है,जब कि विषम संख्या में दीपक जलाने पर वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है. यही वजह है कि धार्मिक कार्यों में हमेशा विषम संख्या में दीपक जलाए जाते हैं.

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