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International Tea Day: 9 करोड़ रुपये किलो वाली चाय, जिसे कहा जाता है ‘जीवन का अमृत’

International Tea Day: हर साल 21 मई को मनाया जाता है। दुनिया भर में चाय लवर्स की कमी नहीं है, अगर आप से कहा जाए कि 9 करोड़ रुपये की चाय खरीद लो तो क्या आप खरीद लेंगे। शायद उसके फायदे जानने के बाद आप खरीद लेंगे वरना इतने रुपये में तो आप 4 बंगला-गाड़ी ले सकते हैं। आज अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर हम आपको दुनिया की सबसे महंगी चाय के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। इस बेहद खास चाय को सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि ‘जीवन अमृत’ माना जाता है। इसकी दुर्लभता, खास तरीके से तैयार होने की प्रक्रिया और सेहत से जुड़े अनोखे फायदों की वजह से यह दुनिया की सबसे महंगी चायों में गिनी जाती है। आइए जानते हैं आखिर क्या है इस चाय की खासियत और क्यों लोग इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च करने को तैयार रहते हैं।

कौन सी है ये चाय

हम जिस 9 करोड़ रुपये वाली चाय की बात कर रहे हैं, उसका नाम है दा-होंग-पाओ-टी (Da-Hong Pao Tea) है। चीन के फुजियान प्रांत के वूई पहाड़ों में उगाई जाती है। इस चाय का पौधा पहाड़ों के चट्टानों के बीच उगता है और वहां के सभी मिनरल्स को सोख लेता है। इसकी कीमत के कारण हर कोई इसे नहीं नहीं खरीद सकता। इस चाय के पौधे सैकड़ों साल पुराने हैं और अब इनकी संख्या ना के बराबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब इस चाय के सिर्फ 6-7 पौधे ही बचे हैं।

स्वाद कैसा होता है

एक्सपर्ट के अनुसार, इस चाय का स्वाद काफी स्ट्रॉन्ग, मिट्टी जैसा और थोड़ा मीठा होता है। इसका स्वाद लंबे समय तक जुबान पर बना रहता है। इसका जायका और खुशबू गले में काफी देर तक बनी रहती है और यही कारण है कि इसे रॉक टी भी कहा जाता है।

लाखों में हुई थी नीलामी

रिपोर्ट्स के मानें तो साल 2002 में इस चाय की सिर्फ 20 ग्राम की नीलामी 26.17 लाख रुपये में हुई थी। इसके बाद साल 2006 के बाद से चीन सरकार ने इन प्राचीन पौधों की पत्तियों को तोड़ने पर पूरी तरह से रोक लगा दी। इसकी वजह से अब इसकी कीमत करोड़ों में पहुंच चुकी है।

खासियत क्या है

ऐसा कहा जाता है कि पुराने समय में मिंग राजवंश की महारानी की जान इस चाय ने बचाई थी। जब सभी वैद्य उनका इलाज करने में असमर्थ हो चुके थे, तब एक आदमी ने उन्हें ये चाय पिलाई और इसे पीते ही वह स्वस्थ हो गईं। उस वक्त इस चाय के पौधे पर राजा ने लाल रंग का चोला पहनाया था और तभी से इसका नाम जीवन दायिनी रखा गया। उस समय ये चाय सिर्फ राजाओं के लिए होती थी और अब हर कोई इसे पीना चाहता है।

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