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बस्तर दशहरा की जोगी बिठाई रस्म पूरी, नौ दिनों तक तपस्या में लीन रहेंगे दौलत नाग

विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं में शामिल जोगी बिठाई की रस्म आज जगदलपुर के सिरहासार भवन में विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। करीब 600 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत इस वर्ष आमाबाल निवासी दौलत कुमार नाग जोगी के रूप में अगले नौ दिनों तक निर्जल तपस्या करेंगे।

बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। जोगी बिठाई की रस्म इसी पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस परंपरा में जोगी बनकर साधना करने वाला व्यक्ति दशहरा के निर्विघ्न और शांतिपूर्ण आयोजन की कामना के साथ तपस्या करता है।

नौ दिनों तक करेंगे निर्जल तपस्या

इस वर्ष जोगी की भूमिका आमाबाल निवासी दौलत कुमार नाग निभा रहे हैं। जोगी बिठाई की रस्म पूरी होने के बाद वे अगले नौ दिनों तक निर्जल तपस्या करेंगे। इस दौरान उनकी साधना बस्तर दशहरा की धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़ी रहेगी।

बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा है जोगी बिठाई

जोगी बिठाई की परंपरा करीब छह शताब्दियों से चली आ रही है। मान्यता है कि जोगी की तपस्या से बस्तर दशहरा का आयोजन बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होता है। यही वजह है कि इस रस्म को पर्व की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में गिना जाता है।

हालांकि, इस बार जोगी बिठाई की रस्म के साथ हल्बा समाज की जाति संबंधी मांग का मुद्दा भी सामने आया है. समाज का कहना है कि लंबे समय से आश्वासन मिलने के बावजूद उसकी मांग पूरी नहीं हुई है. यहां तक कि जोगी के रूप में तपस्या कर रहे दौलत कुमार नाग ने भी मांग पूरी नहीं होने पर अगले साल इस परंपरा में शामिल नहीं होने की बात कही है.

पुरानी मान्यता से जुड़ी है जोगी बिठाई की परंपरा

दरअसल, जोगी बिठाई की परंपरा एक पुरानी मान्यता से जुड़ी है. कहा जाता है कि वर्षों पहले दशहरा पर्व के दौरान हल्बा समाज का एक युवक महल के पास नौ दिनों तक निर्जल उपवास रखकर तपस्या करने बैठ गया था. जब तत्कालीन महाराज को इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने युवक से तपस्या करने का कारण पूछा. युवक ने बताया कि वह बस्तर दशहरा को शांतिपूर्ण और बिना किसी बाधा के संपन्न कराने की कामना से साधना कर रहा है.

इसके बाद महाराज ने सिरहासार भवन का निर्माण करवाया और इस परंपरा को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया. तभी से हर साल जोगी बिठाई की रस्म निभाई जा रही है. इस साल दौलत कुमार नाग तीसरी बार जोगी के रूप में तपस्या करने बैठे हैं. उन्होंने मां दंतेश्वरी सहित देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेकर अपनी साधना शुरू की. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय जनप्रतिनिधि सिरहासार भवन पहुंचे.

नौ दिनों तक निर्जल रहकर तपस्या करेंगे जोगी

डिप्टी कलेक्टर सी.पी. बघेल ने जोगी बिठाई को बस्तर दशहरा की एक महत्वपूर्ण रस्म बताते हुए कहा कि हर साल की तरह इस बार भी जोगी नौ दिनों तक निर्जल रहकर दशहरा पर्व के सफल आयोजन के लिए तपस्या करेंगे. उन्होंने कहा कि इस रस्म को लेकर लोगों में काफी उत्साह है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. वहीं, जगदलपुर के तहसीलदार राहुल गुप्ता ने बताया कि जोगी बिठाई की रस्म पूरी हो चुकी है और अगले नौ दिनों तक जोगी की साधना जारी रहेगी.

उन्होंने हल्बा समाज की जाति संबंधी मांग को लेकर कहा कि समाज की ओर से अपनी समस्या रखी गई है. इस संबंध में दस्तावेज भी दिखाए गए हैं और मामले को आगे शासन स्तर पर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है.

मांग पूरी नहीं हुई तो अगले साल रस्म में शामिल नहीं होंगे दौलत नाग

इधर, जोगी बने दौलत कुमार नाग ने बताया कि वह तीसरी बार इस परंपरा में शामिल हुए हैं और अगले नौ दिनों तक बस्तर दशहरा के निर्विघ्न आयोजन की कामना के साथ तपस्या करेंगे. हालांकि, उन्होंने हल्बा समाज की जाति संबंधी मांग पूरी नहीं होने पर नाराजगी भी जताई. दौलत नाग का कहना है कि समाज को लंबे समय से आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है.

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि मांग पूरी नहीं होती है, तो अगले साल वह जोगी बिठाई की रस्म में शामिल नहीं होंगे. बस्तर दशहरा की आस्था और परंपरा से जुड़ी जोगी बिठाई की यह रस्म जहां नौ दिनों की कठिन तपस्या के साथ शुरू हो गई है, वहीं हल्बा समाज की लंबित मांग ने इस बार एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है. अब देखना होगा कि शासन स्तर पर समाज की मांग को लेकर क्या पहल की जाती है.

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