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बंगाल का सियासी संग्राम: ममता बनर्जी के प्रस्तावक पर IT की रेड

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच सियासी सरगर्मी और तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग और प्रशासन की मुस्तैदी के बावजूद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी कड़ी में, आयकर विभाग (I-T Department) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले उनके प्रस्तावक (Proposer) के ठिकानों पर छापेमारी की है। चुनाव के ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने राज्य के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है।

राजनीति में हलचल, टीएमसी का विरोध

ममता बनर्जी के भवानीपुर प्रस्तावक मिराज शाह के घर आयकर विभाग द्वारा की गई रेड ने बंगाल की राजनीति में तूफान मचा दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आयकर विभाग की टीम ने कोलकाता के एल्गिन रोड स्थित मिराज शाह के आवास पर छापा मारा। मिराज शाह उन चार प्रस्तावक में से एक हैं जिन्होंने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता बनर्जी के नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस कार्रवाई को चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का एक प्रयास बताया है। पार्टी का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केंद्र की एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है। टीएमसी के विधायक देबाशीष कुमार के घर पर पहले हुई छापेमारी के बाद यह कार्रवाई की गई है। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और टैक्स चोरी के इनपुट के आधार पर की गई है।

टीएमसी ने उठाई आवाज़

बेलेघाटा से टीएमसी के उम्मीदवार कुणाल घोष ने कहा कि ममता बनर्जी के प्रपोजर के घर पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की रेड लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि सरकार जानती है कि वह चुनाव हारने वाली है, इसलिए वह चुनाव का माहौल खराब कर रही है। मिराज शाह, जो एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और एक एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के प्रमुख हैं, ममता बनर्जी के नॉमिनेशन पेपर के प्रपोजर्स में से एक हैं। आयकर विभाग की इस कार्रवाई के बाद टीएमसी ने आरोप लगाया कि यह सब कुछ चुनाव से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है।

छापेमारी से पहले की गई हैं कई कार्रवाइयाँ

सिर्फ मिराज शाह ही नहीं, बल्कि टीएमसी के एक अन्य कद्दावर नेता और रासबिहारी सीट से उम्मीदवार देबाशीष कुमार के ठिकानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। आयकर विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह देबाशीष कुमार के घर और ऑफिस पर भी छापेमारी शुरू की। कुछ दिन पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के ऑफिस पर छापेमारी की थी, जिस पर आरोप है कि उसने नगरपालिका की मदद से अनधिकृत निर्माण कार्य किया है। देबाशीष कुमार के क्षेत्र में भी ऐसी गतिविधियाँ सामने आई हैं, जो केंद्रीय एजेंसियों की जांच का कारण बनी हैं। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद आयकर विभाग ने कुमार के घर और ऑफिस पर रेड मारी।

प्रपोजर के साथ आईरेड में सेंट्रल एजेंसी की भागीदारी

आयकर विभाग ने कालीघाट में टीएमसी नेता कुमार साहा के घर पर भी छापेमारी की और ममता बनर्जी के भवानीपुर क्षेत्र में प्रपोजर मिराज शाह के घर पर भी रेड की। सूत्रों के अनुसार, आयकर अधिकारी पिछले 5-10 सालों के उनके इनकम अकाउंट्स की जांच कर रहे हैं। जानकारी मिली है कि 2022 में भी शाह के घर पर तलाशी ली गई थी। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की इस कार्रवाई पर टीएमसी ने डटकर विरोध किया है।

टीएमसी ने बीजेपी पर लगाया गंभीर आरोप

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर चुनाव के दौरान उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों को डराने की कोशिश कर रही है। वहीं, बीजेपी ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक स्वतंत्र जांच प्रक्रिया बताया है। कुणाल घोष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि हम सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “चुनाव चल रहे हैं और मुख्यमंत्री के प्रपोजर के घरों पर रेड हो रही है। सरकार का यह कदम निंदनीय है।” इस रेड के बाद बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, और टीएमसी इसे चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश मानती है।

नियमित जांच या राजनीतिक प्रतिशोध

चुनाव के दौरान जांच एजेंसियों की इस सक्रियता ने बंगाल की लड़ाई को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। जहां एक तरफ एजेंसियां इसे अपनी नियमित जांच का हिस्सा बता रही हैं, वहीं विपक्षी दल इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह छापेमारी चुनावी नतीजों और जनता की राय पर क्या प्रभाव डालती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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