नागांव। असम के नौगांव की एक अदालत ने आठ साल पहले भीड़ द्वारा दो व्यक्तियों को बच्चा चोर होने के संदेह में पीटकर मार डालने के मामले में 20 लोगों को सोमवार को दोषी ठहराया और मामले में आरोपी 25 अन्य को बरी कर दिया. यह मामला अभि-नील मॉब लिंचिंग के नाम से जाना जाता है. मामले में कुल 48 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन तीन अन्य आरोपी नाबालिग थे और उन्हें वर्तमान में जोरहाट किशोर सुधार गृह में रखा गया है.
नागांव सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसले में आरोप पत्र में नामजद 48 आरोपियों में से 20 को सजा सुनाई. अंतिम सजा का विवरण 24 अप्रैल को दिया जाएगा. अभिजीत नाथ और निलोत्पल दास के माता-पिता के लिए यह खुशी की बात तो नहीं है, लेकिन बड़ी राहत है, जो 2018 से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे थे. अभिजीत और निलोत्पल, जिन्हें उनकी दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु के बाद अभि-नील के नाम से जाना जाने लगा, 8 जून 2018 को अपनी जान गंवा बैठे थे.
दोनों प्रकृति से भरपूर पश्चिम कार्बी जिले के आंगलोंग के भीतरी इलाकों में घूमने गए थे और लौटते समय एक उग्र भीड़ ने उन्हें घेर लिया और मॉब लिंचिंग में उनकी जान चली गई. दरअसल, उस दुर्भाग्यपूर्ण रात गांवों में अपहरणकर्ताओं के घूमने की अफवाह जंगल की आग की तरह फैल गई थी.
इस खबर में कोई सच्चाई नहीं थी. लेकिन गुवाहाटी के इन दोनों युवकों के लिए यही खबर घातक साबित हुई. उस फर्जी खबर ने सैकड़ों ग्रामीणों को डोकमोका के एक अंदरूनी इलाके में इकट्ठा होने के लिए उकसाया, जहां अभि और नील दोनों ने अपना वाहन रोका और उस उग्र भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें देखा जा सकता था कि अभी और नील, दोनों यह कह रहे थे कि उनका बच्चा चोरी से कोई संबंध नहीं है. लेकिन भीड़ ने पंजुरी में उन्हें बाहर खींचा और उनकी पिटाई शुरू कर दी.

पुलिस दोनों को अस्पताल ले गई, लेकिन रास्ते में ही दोनों की मौत हो गई. दोनों युवकों के पिता गोपाल चंद्र दास और अजीत कुमार नाथ सोमवार को अदालत में मौजूद थे. उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा कि वे 25 लोगों के बरी होने से असंतुष्ट हैं और इस फैसले के खिलाफ गुवाहाटी हाईकोर्ट में अपील करेंगे.
कुल 48 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 3 नाबालिगों को बरी कर दिया गया. 45 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया. सोमवार को नागांव सत्र न्यायालय ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए 20 आरोपियों को सजा सुनाई और 25 अन्य को बरी कर दिया.
फैसले के दिन, मृतकों के माता-पिता ने अपनी संतुष्टि नहीं जताई और मीडिया के सामने सभी आरोपियों को सजा दिलाने के लिए उच्च न्यायालय जाने की बात कही. दीफू पुलिस ने इस मामले में 800 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया और कार्बी आंगलोंग की दीफू अदालत में मुकदमा शुरू हुआ, जिसे बाद में 4 सितंबर, 2018 को नागांव अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया.



















