ब्रेकिंग खबरें

राष्ट्रीयट्रेंडिंगतकनीकी

अडानी ग्रुप में AI की एंट्री: क्या नौकरियों पर पड़ेगा असर? कंपनी में बदलाव की तैयारी समझें

Adani Group अपने कामकाज के तरीके और कर्मचारियों की संरचना में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य ऐसी वर्कफोर्स तैयार करना है, जिसमें युवा कर्मचारियों की भागीदारी बढ़े और महिलाओं की संख्या में भी इजाफा हो। कंपनी की योजना के तहत रोजमर्रा के दोहराए जाने वाले कामों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स तकनीक की मदद से स्वचालित किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को अधिक महत्वपूर्ण, रचनात्मक और रणनीतिक जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।

अडानी ग्रुप में इस बदलाव की कमान परिवार और कंपनी के टॉप अधिकारियों ने संभाली है। गौतम अडानी (चेयरमैन) कुछ भूमिकाओं को आउटसोर्सिंग को सौंपने के काम की देखरेख कर रहे हैं। वहीं, करण अडानी (मैनेजिंग डायरेक्टर, अडानी पोर्ट्स) कंपनी में युवाओं को शावमिल करने और विविधता (Diversity) बढ़ाने के अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। जुगेशिंदर सिंह (ग्रुप CFO) को AI और इंसानों के मिलकर काम करने वाले मॉडल (Cobotic Workforce Model) को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। हाल ही में उन्हें HR और IT जैसे विभागों का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है।

कंपनी एक ऐसा सिस्टम बना रही है, जहां AI और इंसान मिलकर काम करेंगे। डाटा एंट्री, बिल बनाना (Invoice Generation) और सैलरी कैलकुलेशन जैसे तय नियमों वाले काम अब AI बॉट्स करेंगे। वहीं, सेल्स, बिजनेस स्ट्रेटेजी और क्लाइंट मैनेजमेंट जैसे कामों में मुख्य भूमिका इंसानों की ही रहेगी, लेकिन उन्हें असिस्ट करने के लिए AI मौजूद होगा। इसके अलावा परफॉर्मेंस रिव्यू करने के लिएकंपनी अब मैनेजरों के फीडबैक के बजाय AI और स्कोर-बेस्ड (अंकों पर आधारित) सिस्टम से कर्मचारियों के काम का मूल्यांकन करने की योजना बना रही है।

अडानी ग्रुप अपनी टीम की औसत उम्र को कम करना चाहता है और महिलाओं की संख्या बढ़ाना चाहता है।

युवाओं को मौका:- कंपनी अनुभवी लोगों के बजाय ऊर्जावान और युवा प्रोफेशनल्स को काम पर रखने और उन्हें तेजी से आगे बढ़ाने के लिए लीडरशिप प्रोग्राम शुरू कर रही है।

महिलाओं की हिस्सेदारी:- साल 2025-26 के अंत तक ग्रुप में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 5% थी। इसे सुधारने के लिए उदाहरण के तौर पर अडानी पावर ने महिला ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनीज की भर्ती बढ़ाई है, जिससे वहां महिलाओं का अनुपात बढ़ा है।

फैसले तेजी से लिए जा सकें, इसके लिए कंपनी अपने मैनेजमेंट के लेवल को घटाकर केवल 3 लेयर्स स्ट्रक्चर (Three-Layer Structure) में समेट रही है। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे इन-हाउस कामों को बाहरी वेंडर्स को आउटसोर्स किया जा रहा है। इसके तहत कई ऑन-साइट कर्मचारियों को वेंडर्स के पेरोल पर शिफ्ट किया गया है। उदाहरण के लिए अडानी ग्रीन एनर्जी के आंतरिक कर्मचारियों की संख्या में बड़ी कमी आई है,क्योंकि काम वेंडर्स को दे दिया गया है।

इतने बड़े और तेजी से हो रहे बदलावों के कारण कर्मचारियों के बीच थोड़ी घबराहट और असंतोष भी देखा जा रहा है।

सैलरी हाइक पर असर:– इस साल अप्रैल में पुरानी व्यवस्था के तहत हुए अप्रेजल से कई कर्मचारी नाखुश दिखे, क्योंकि नया AI सिस्टम अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।

वेंडर शिफ्ट का विरोध:- गुजरात के हजीरा पोर्ट पर कुछ क्रेन ऑपरेटरों ने तब हड़ताल कर दी, जब उन्हें वेंडर के पेरोल पर शिफ्ट किया गया, क्योंकि वे कंपनी के कर्मचारियों को मिलने वाले विशेष बोनस से वंचित रह गए थे।

मैनेजमेंट का भरोसा:- कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि किसी भी नई शुरुआत में शुरुआती दिक्कतें आती हैं। इसे दूर करने के लिए खुद गौतम अडानी और सीनियर लीडरशिप सीधे ग्राउंड लेवल पर जाकर कर्मचारियों से बात कर रहे हैं, ताकि उनका भरोसा बना रहे।

अडानी ग्रुप का यह प्रयोग भारत के कॉर्पोरेट जगत के लिए एक नया उदाहरण पेश कर सकता है। यदि यह सफल रहता है, तो देश की अन्य बड़ी कंपनियां भी AI के इस दौर में अपनी वर्कफोर्स को इसी तरह री-डिजाइन कर सकती हैं।

कुल मिलाकर अडानी समूह का यह कदम दिखाता है कि भारत की बड़ी कंपनियां अब AI, डिजिटल तकनीक और आधुनिक कार्य संस्कृति की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। आने वाले वर्षों में यह मॉडल अन्य बड़ी कंपनियों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

What's your reaction?

Related Posts