बिलासपुर। सफाई कर्मियों के नाम पर फर्जी वेतन आहरण के पुराने मामले में हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए जगदलपुर के तत्कालीन सीएमएचओ, लेखापाल समेत 10 आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
यह मामला वर्ष 1979 से 1985 के बीच का है। आरोप था कि तत्कालीन सीएमएचओ डा. आरके सेन ने तीन अस्थायी सफाई कर्मियों को उनके कार्यस्थल पर तैनात करने के बजाय अपने घर पर घरेलू काम में लगा दिया। बाद में उनके नौकरी छोड़ने के बावजूद उनके नाम पर फर्जी वेतन बिल बनाकर करीब 42 हजार रुपये आहरित किए गए। मामले में लोकायुक्त भोपाल ने 1985 में अपराध दर्ज कर चालान पेश किया था।
विशेष न्यायाधीश ने सभी आरोपितों को दो-दो साल की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ आरोपितों ने हाई कोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान पांच आरोपितों की मौत हो गई, जिनके परिजनों ने मुकदमा आगे बढ़ाया। शेष चार आरोपित भी अपील में शामिल रहे। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आपराधिक
साजिश साबित करने के लिए ठोस और स्पष्ट साक्ष्य जरूरी हैं, जो इस मामले में प्रस्तुत नहीं किए गए। कोर्ट ने पाया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए गए, वे मूल नहीं बल्कि केवल कार्बन कापी थे, जिन्हें कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही कथित लाभार्थियों द्वारा भी वेतन प्राप्ति के संबंध में ठोस प्रमाण नहीं दिए गए। कोर्ट ने यह भी माना कि अधीनस्थ अधिकारी अपने वरिष्ठ के निर्देशों का पालन कर रहे थे और उनके खिलाफ किसी स्वतंत्र आपराधिक मंशा का प्रमाण नहीं है। इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाई कोर्ट ने सभी आरोपितों की सजा रद कर उन्हें बरी कर दिया।



















