अगर आप सोना खरीदना चाहते हैं और रेट देखकर सोचते हैं कि कम से कम एक लाख जेब में होना चाहिए तो आप गलत हैं। अगर आपके बैंक खाते में 10 रुपये भी हैं तो आपकी सोना खरीदने की हसरत पूरी हो सकती है बशर्ते आप सर्राफा बाजार से गहने खरीदने के बजाय सोना डिजिटल गोल्ड के रूप में खरीदें। आइए समझते हैं डिजिटल गोल्ड क्या है, इसके फायदे और नुकसान क्या-क्या हैं और भारतीय परिवारों में कितना सोना है?
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में मौजूद सोने का कुल मूल्य लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 467 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि यह रकम देश में गैर-संपत्ति वाली कुल संपत्ति का 65% हिस्सा है।
अर्थ भारत इन्वेस्टमेंट के फाउंडर सचिन सावरिकर के अनुसार, देश के 24 करोड़ परिवारों के पास कुल 25,000 से 30,000 टन सोना मौजूद है। औसतन, हर परिवार के पास करीब 100 से 150 ग्राम सोना है, जिसकी कीमत वर्तमान रेट के हिसाब से15 से 20 लाख रुपये के बीच है।
डिजिटल गोल्ड क्या है?
डिजिटल गोल्ड, फिजिकल गोल्ड की तरह ही है, लेकिन इसे आप ऑनलाइन खरीदते हैं। आपके द्वारा खरीदा गया सोना, किसी ट्रस्टेड वॉल्ट (तिजोरी) में रखा जाता है। आपको उसकी फिजिकल डिलीवरी नहीं लेनी होती। यह पूरी तरह से पेपरलेस और डिजिटल प्रक्रिया है। क्लियर टैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल गोल्ड और भौतिक सोने में कोई गुणात्मक अंतर नहीं है, फर्क सिर्फ भंडारण और खरीद के तरीके का है।
डिजिटल गोल्ड के फायदे?
1. बहुत कम राशि से शुरुआत: आप मात्र ₹10 से भी डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं। यह छोटे निवेशकों के लिए बेहतरीन विकल्प है।
2. चोरी या नुकसान का डर नहीं: फिजिकल गोल्ड की तरह आपको लॉकर या सुरक्षा की चिंता नहीं करनी पड़ती। डिजिटल गोल्ड को कंपनी की सुरक्षित तिजोरियों में रखा जाता है, जिसका बीमा भी होता है।
3. कभी भी खरीदें या बेचें: आप इसे 24×7 ऑनलाइन खरीद और बेच सकते हैं। इसके लिए डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं होती। पैसे सीधे आपके बैंक खाते में आ जाते हैं।
4. मेकिंग चार्ज नहीं: जेवरात खरीदते समय जो 10-25% का मेकिंग चार्ज लगता है, वह डिजिटल गोल्ड में नहीं होता। आप शुद्ध सोने की कीमत ही चुकाते हैं।
5. गिफ्ट देने में आसानी: आप डिजिटल गोल्ड को ऑनलाइन गिफ्ट कर सकते हैं। शादी, त्योहार या जन्मदिन पर यह एक सुविधाजनक तोहफा है।
6. फिजिकल गोल्ड में बदलने का विकल्प: कई डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म (जैसे, जियो फाइनेंस, SafeGold, Augmont) आपको एक निश्चित मात्रा (जैसे 5 ग्राम या 10 ग्राम) जमा करने पर सोने का सिक्का या बार देने की सुविधा देते हैं।
कोई निगरानी नहीं: डिजिटल गोल्ड की सबसे बड़ी कमी यह है कि RBI या SEBI इस पर निगरानी नहीं रखते। अगर कंपनी दिवालिया हो जाती है या धोखाधड़ी करती है, तो आपका पैसा फंस सकता है।
कोई नियमित ब्याज नहीं: डिजिटल गोल्ड पर आपको कोई ब्याज नहीं मिलता। फायदा केवल तभी होता है जब सोने की कीमत बढ़ती है और आप बेचते हैं।
चार्जेज और टैक्स: खरीद पर 3% GST लगता है, जो भौतिक फिजिकल गोल्ड सोने के समान ही है। कुछ प्लेटफॉर्म स्टोरेज चार्ज, बीमा शुल्क और प्लेटफॉर्म चार्ज लेते हैं, जिससे आपका रिटर्न कम हो सकता है।
हाई रिस्क: विशेषज्ञ डिजिटल गोल्ड को “हाई रिस्क” श्रेणी में रखते हैं, क्योंकि इसमें नियामकीय सुरक्षा नहीं है। साधारण निवेशकों को इसमें सावधानी बरतनी चाहिए।
किसके लिए डिजिटल गोल्ड है सही
अगर आप सोने में केवल व्यक्तिगत उपयोग जैसे शादी, परंपरा, बच्चों की पढ़ाई, त्योहार आदि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो फिजिकल गोल्ड ठीक है, लेकिन अगर आप निवेश के नजरिए से सोना खरीद रहे हैं, तो डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प ज्यादा बेहतर हो सकते हैं।
डिजिटल गोल्ड पर टैक्स की गणना कैसे होती है
मान लीजिए आपने ₹1,00,000 का डिजिटल गोल्ड खरीदा और 3 साल बाद ₹1,50,000 में बेचा, तो ₹50,000 के मुनाफे पर लगभग 12.5% + 4% उपकर = ~13% टैक्स बनेगा। यानी करीब ₹6,500 टैक्स देना होगा।
डिजिटल गोल्ड खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान
केवल प्रसिद्ध और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म (जैसे SafeGold, Augmont, MMTC-PAMP, PhonePe, Google Pay) का ही उपयोग करें। छोटी और अजनबी कंपनियों से डिजिटल गोल्ड खरीदने से बचें। खरीदते समय यह भी देखें कि कहीं कोई छिपा हुआ स्टोरेज शुल्ल तो नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार आपके कुल निवेश पोर्टफोलियो का 10% से अधिक सोने में नहीं होना चाहिए। बाकी पैसा शेयर, FD, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड आदि में लगाएं।
चूंकि डिजिटल गोल्ड पर RBI/SEBI का नियंत्रण नहीं है, इसलिए बड़ी रकम एक साथ न लगाएं। छोटे-छोटे हिस्सों में निवेश करें। अगर आप भविष्य में सोना बार या सिक्का लेना चाहते हैं, तो न्यूनतम मात्रा (जैसे 10 ग्राम) और डिलीवरी शुल्क पहले से जान लें।



















