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सुशासन तिहार 1 मई से: सीएम के औचक दौरे से प्रशासन में हलचल, लंबित शिकायतों पर बढ़ा दबाव

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 1 मई से “सुशासन तिहार” की शुरुआत होने जा रही है। सुशासन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू किए जा रहे इस अभियान ने जिला प्रशासन में हलचल बढ़ा दी है। खासकर कलेक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच तनाव का माहौल देखा जा रहा है, क्योंकि इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय खुद जिलों और गांवों में अचानक पहुंचकर जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे।

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री बिना पूर्व सूचना के किसी भी जिले या गांव का दौरा कर सकते हैं। वे ग्रामीणों से सीधे संवाद कर सरकारी योजनाओं का लाभ, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर फीडबैक लेंगे। इसके साथ ही विकास कार्यों की समीक्षा बैठक भी करेंगे।

अधिकारियों पर बढ़ा दबाव, पिछली कार्रवाई की याद

पिछले सुशासन तिहार के दौरान लापरवाही बरतने पर कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई हुई थी। इसी कारण इस बार प्रशासनिक अमले में पहले से ही सतर्कता बढ़ गई है। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित करें।

36 हजार से ज्यादा शिकायतें लंबित

जनशिकायत निवारण विभाग के पोर्टल पर वर्तमान में 36,338 शिकायतें लंबित बताई जा रही हैं। इनकी निगरानी सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा की जा रही है। सुशासन तिहार के दौरान इन शिकायतों के निराकरण की स्थिति भी परखी जाएगी, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही और बढ़ गई है।

फीडबैक के आधार पर होगी रैंकिंग

अभियान के दौरान मिलने वाले फीडबैक और समीक्षा बैठकों के आधार पर कलेक्टरों के कार्यों की रैंकिंग तैयार की जाएगी। यह रैंकिंग भविष्य में उनकी जिम्मेदारियों और संभावित स्थानांतरण को भी प्रभावित कर सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री का ग्रामीणों से सीधा संवाद प्रशासनिक कामकाज की वास्तविक स्थिति सामने लाएगा। ऐसे में सभी स्तर पर अधिकारियों को बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

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