छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में पुनर्वास नीति और पुलिस के ‘ऑपरेशन प्रयास’ के तहत एक बड़ी सफलता सामने आई है. नक्ससल संगठन से जुड़ी 1 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर दिया है. पुलिस दबाव के बढ़ने और संगठन के भीतर भेदभाव से परेशान होकर उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया.
आत्मसमर्पण करने वाली महिला की पहचान
आत्मसमर्पण करने वाली महिला की पहचान देहकी उर्फ जीत्ती के रूप में हुई है, जो रावघाट LOS/SOS की सक्रिय सदस्य रही है. वह कांकेर जिले के मदनबाड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम मुंजाल (राउतपारा) की रहने वाली है. बताया जा रहा है कि वह साल 2010 में नक्सल विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन में शामिल हुई थी और शुरुआती दौर में मदनबाड़ा क्षेत्र में सक्रिय रही. इसके बाद उसने माड़ क्षेत्र में भी लंबे समय तक काम किया और रावघाट एरिया कमेटी के तहत कई गतिविधियों में शामिल रही.
भेदभाव और अत्याचार से हुई निराश
देहकी ने आत्मसमर्पण के पीछे संगठन के अंदर चल रहे मतभेद और नेतृत्व के उपेक्षापूर्ण रवैये को बड़ी वजह बताया है. उसने यह भी कहा कि नक्सलियों द्वारा स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों पर किए जा रहे अत्याचारों से वह काफी निराश हो चुकी थी. अब वह अपने परिवार के साथ शांत और सामान्य जीवन जीना चाहती है.
आत्मसमर्पण के बाद देहकी उर्फ जीत्ती ने कहा कि नक्सली संगठन की विचारधारा खोखली है और इसी वजह से उसने संविधान में भरोसा जताते हुए मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया.
पुलिस ने की अपील
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह सफलता पुलिस महानिरीक्षक बालाजी राव सोमावर के मार्गदर्शन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाय.पी. सिंह के निर्देशन में हासिल हुई है. आत्मसमर्पण करने वाली महिला को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी जरूरी लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. साथ ही जिला पुलिस ने अन्य नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की धारा से जुड़ें.



















