रायपुर। प्रदेश में 1 मई से शुरू होने जा रहे “सुशासन तिहार” के दौरान जहां एक ओर सरकार अपने स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यों का मूल्यांकन करेगी, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी अपने मंत्रियों, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा करेगी। पार्टी आम जनता के बीच उनकी छवि, कार्यशैली और जनसमस्याओं के समाधान को लेकर फीडबैक जुटाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, सुशासन तिहार के दौरान मंत्रियों और विधायकों के पास पहुंचने वाले आवेदनों और शिकायतों का कितना प्रतिशत निराकरण हो रहा है, इस पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि शिविरों में जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों के खिलाफ किस प्रकार की शिकायतें सामने आती हैं। इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश भाजपा द्वारा आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बताया जा रहा है कि सरकार के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद बदलते राजनीतिक माहौल को देखते हुए भाजपा अपनी जमीनी स्थिति का आकलन करना चाहती है। पार्टी का फोकस संभावित एंटी-इन्कम्बेंसी को समय रहते कम करने पर रहेगा, ताकि आगामी चुनावों में इसका प्रभाव न पड़े।
सोशल मीडिया और विरोधियों पर नजर
सुशासन तिहार के दौरान विपक्षी गतिविधियों और सोशल मीडिया पर चल रही प्रतिक्रियाओं पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। इसके लिए प्रदेश स्तर पर एक अलग टीम गठित किए जाने की तैयारी है, जो यह आकलन करेगी कि सामने आ रही शिकायतें वास्तविक हैं या राजनीतिक रूप से प्रेरित।
बूथ स्तर तक होगी समीक्षा
इस अभियान के तहत जिला से लेकर बूथ स्तर तक भाजपा नेताओं के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। साथ ही सक्रिय कार्यकर्ताओं को गोपनीय रूप से संगठन को अपनी रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए जाएंगे, जिससे जमीनी हकीकत का सटीक आकलन किया जा सके। कुल मिलाकर, सुशासन तिहार को भाजपा संगठन और सरकार दोनों के लिए आत्ममंथन और रणनीतिक सुधार के बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है।



















