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भीषण गर्मी और बढ़ती महंगाई ने बदला समर वेकेशन का ट्रेंड

रायपुर। स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही परिवारों में घूमने-फिरने की योजनाएं बनना आम बात होती है, लेकिन इस बार भीषण गर्मी, पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ और महंगाई के कारण कई परिवारों ने अपने वेकेशन प्लान में बदलाव कर दिया है। लंबी यात्राओं और हिल स्टेशनों की सैर की जगह अब अभिभावक बच्चों के साथ घर पर समय बिताने और उन्हें नई-नई जीवन उपयोगी कौशल सिखाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अभिभावकों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान के बीच बच्चों को लंबी यात्रा पर ले जाना जोखिम भरा हो सकता है। वहीं, पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ और यात्रा खर्च में हुई बढ़ोतरी ने भी परिवारों का बजट प्रभावित किया है। ऐसे में इस बार कई घरों का आंगन ही बच्चों के लिए समर कैंप का रूप ले चुका है।

लाइफ स्किल्स पर बढ़ा फोकस

गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को केवल मनोरंजन तक सीमित रखने के बजाय अभिभावक उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। घरों में बच्चों को अपना बिस्तर समेटना, कमरे की सफाई रखना, पौधों को पानी देना, जूते और सामान व्यवस्थित रखना तथा नींबू पानी और सलाद जैसी सरल चीजें बनाना सिखाया जा रहा है।

कई परिवारों में बच्चे किचन के छोटे-मोटे कामों में हाथ बंटा रहे हैं, जबकि कुछ गार्डनिंग और घरेलू प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों में रुचि ले रहे हैं। अभिभावकों का मानना है कि इससे बच्चों में जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है और उनका स्क्रीन टाइम भी कम होता है।

इंडोर गेम्स की वापसी

मोबाइल और वीडियो गेम्स से बच्चों को दूर रखने के लिए घरों में लूडो, कैरम और शतरंज जैसे पारंपरिक खेलों की वापसी भी देखने को मिल रही है। परिवार सामूहिक रूप से इन खेलों में हिस्सा लेकर बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिता रहे हैं।

प्रकृति से जुड़ने की सीख

कई परिवार बच्चों को पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनाने का भी प्रयास कर रहे हैं। घरों की छतों और आंगन में पक्षियों के लिए पानी रखना तथा पौधों की देखभाल जैसी गतिविधियां बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन रही हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी की छुट्टियों में बच्चों की दिनचर्या में बहुत अधिक बदलाव नहीं करना चाहिए। उन्हें पौष्टिक आहार देना, शारीरिक गतिविधियों में शामिल करना और उनकी रुचि के अनुसार छोटे प्रशिक्षण या कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ना लाभदायक हो सकता है। साथ ही, घर के छोटे-छोटे कामों में सहभागिता से बच्चों में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी दोनों का विकास होता है।

बदल रहा है छुट्टियों का स्वरूप

एक समय गर्मी की छुट्टियों का मतलब केवल पर्यटन और मौज-मस्ती माना जाता था, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। बढ़ती गर्मी और आर्थिक दबाव के बीच अनेक परिवार छुट्टियों को बच्चों के व्यक्तित्व विकास और पारिवारिक जुड़ाव का अवसर मान रहे हैं। यही कारण है कि इस बार समर वेकेशन का रंग बदला-बदला नजर आ रहा है।

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