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बारिश अटकी: 23 जिलों में सामान्य से आधी भी नहीं वर्षा, अल-नीनो ने बढ़ाई किसानों की चिंता

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की सुस्त रफ्तार ने किसानों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के 33 जिलों में से 23 जिलों में सामान्य से 50 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है। खेतों में बुआई प्रभावित होने लगी है, वहीं अल-नीनो के संभावित असर को देखते हुए राज्य सरकार जल्द ही उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर खरीफ सीजन की रणनीति तय करेगी।

 कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा है कि मानसून की स्थिति और खरीफ फसलों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अल-नीनो के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए जल्द समीक्षा बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें किसानों को राहत देने और फसल प्रबंधन की रणनीति पर चर्चा होगी।

सामान्य से काफी कम हुई बारिश

राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि तक प्रदेश में सामान्य तौर पर 69 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 29.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है। रायपुर, बिलासपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, राजनांदगांव, बालोद, बेमेतरा, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सुकमा, बीजापुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी समेत 23 जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य के आधे से भी कम है। बारिश की कमी का सीधा असर धान की बुआई और अन्य खरीफ फसलों की तैयारियों पर पड़ने लगा है। किसानों को समय पर पर्याप्त बारिश नहीं मिलने से खेतों में नमी की कमी महसूस की जा रही है।

केंद्र की समीक्षा बैठक पर भी नजर

अल-नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार भी राज्यों के साथ लगातार समीक्षा कर रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 23 जून को खरीफ सीजन की तैयारियों और वर्षा की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगे।

 इस वर्चुअल बैठक में छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि उत्पादन आयुक्त और कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में वर्षा की स्थिति, बुआई की प्रगति और किसानों को वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

खरीफ फसलों और जल संकट पर असर की आशंका

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वर्ष अल-नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक रह सकता है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में इसका असर धान उत्पादन, जल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 12 से 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार मानसून की प्रगति धीमी रही। बस्तर क्षेत्र से मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां देर से बनने के कारण अधिकांश जिलों में बारिश प्रभावित हुई है।

सीमित सिंचाई सुविधाएं बढ़ा रहीं चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि अल-नीनो वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ में अक्सर सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जाती है। राज्य में सिंचाई सुविधाओं का सीमित दायरा भी किसानों की परेशानी बढ़ा सकता है। केंद्र सरकार ने देश के लगभग 200 संवेदनशील जिलों की सूची तैयार की है, जिसमें छत्तीसगढ़ के कई जिले शामिल हैं। ऐसे में जल संरक्षण, खेतों में नमी बनाए रखने, अंतरफसल पद्धति अपनाने, वैकल्पिक फसल चक्र तथा दलहन-तिलहन की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। कृषि विभाग का मानना है कि समय रहते आकस्मिक योजना लागू करने से कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सरकार की नजर मौसम पर

राज्य सरकार का कहना है कि मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। यदि आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो प्रभावित जिलों के लिए विशेष कृषि और जल प्रबंधन योजनाएं लागू की जा सकती हैं। फिलहाल किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं और सभी को मानसून के सक्रिय होने का इंतजार है।

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