रायपुर। राज्य शासन से सामान्य मद की राशि नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे रायपुर नगर निगम ने राजस्व वसूली अभियान तेज कर दिया है। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर 27 मई से 17 जून के बीच करीब 15 करोड़ रुपये की टैक्स वसूली की गई है। साथ ही सभी जोन क्षेत्रों में 50 हजार रुपये से अधिक टैक्स बकाया रखने वाले संपत्ति मालिकों को डिमांड नोटिस जारी कर दिया गया है।
नगर निगम प्रशासन ने सभी जोन कमिश्नरी को प्रतिदिन 10-10 लाख रुपये प्रॉपर्टी टैक्स वसूली का लक्ष्य दिया है। हालांकि जोन-2, जोन-8, जोन-9 और जोन-10 में 75 से 80 करोड़ रुपये तक की बकाया मांग होने के बावजूद अन्य जोनों के समान लक्ष्य निर्धारित किए जाने से राजस्व अमले में असंतोष की स्थिति बताई जा रही है।
निगम के अनुसार शहर के 70 वार्डों में पुराने टैक्स बकायादारों की संख्या 43 हजार तक पहुंच गई है। बड़े बकायादारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। निगम आयुक्त ने नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों का अध्ययन कर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश उपायुक्त राजस्व डॉ. अंजलि शर्मा को दिए हैं।
बिजली कंपनी के 15 करोड़ का समायोजन अटका
नगर निगम के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड से मिलने वाले करीब 15 करोड़ रुपये के प्रॉपर्टी टैक्स का समायोजन अब तक नहीं हो पाया है। निगम ने मार्च और अप्रैल में वसूले गए प्रॉपर्टी टैक्स का बड़ा हिस्सा बिजली बिल भुगतान के रूप में बिजली कंपनी को दिया था। इसके बदले कंपनी से मिलने वाली टैक्स राशि को बिजली बिल में समायोजित करने की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
निजी स्कूल, कॉलेज और सरकारी संस्थानों से भी होगी वसूली
उपायुक्त राजस्व डॉ. अंजलि शर्मा ने बताया कि पुराने बकायादारों के अलावा छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी, निजी स्कूलों और कॉलेजों से कर वसूली के लिए अलग दल गठित करने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों और शासकीय बंगलों से समेकित कर, जलकर, यूजर चार्ज तथा शिक्षा उपकर की वसूली की योजना पर भी काम शुरू हो गया है।
पानी टैक्स वसूली पर रहेगा विशेष फोकस
नगर निगम अब पेयजल कर वसूली को लेकर भी सख्ती बरतने जा रहा है। निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर की 3 लाख 61 हजार 201 संपत्तियों में से 3 लाख 47 हजार संपत्तियों से ही कर प्राप्त होता है, जबकि वैध नल कनेक्शनों की संख्या डेढ़ लाख तक भी नहीं पहुंच सकी है। पेयजल आपूर्ति से निगम को सालाना 50 करोड़ रुपये की आय भी नहीं हो पाती।
डॉ. शर्मा ने बताया कि टैक्स वसूली अभियान के साथ वैध और अवैध नल कनेक्शनों की जांच शुरू की जाएगी। राजस्व बढ़ाने के लिए अवैध नल कनेक्शनों के नियमितीकरण का विशेष अभियान भी चलाया जाएगा, जिससे निगम की आय में वृद्धि हो सके।


















