रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आदेश के पालन नहीं होने पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को प्रमुख पक्षकार बनाकर दायर अवमानना याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवमानना की कार्रवाई अपने स्वभाव से इन पर्सोनाम होती है और कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 के तहत किसी अथॉरिटी या बॉडी कॉर्पोरेट के खिलाफ सीधे अवमानना की कार्रवाई नहीं चलाई जा सकती। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जिम्मेदार अधिकारी को प्रमुख पक्षकार बनाकर नई याचिका दायर करने की छूट दी है। याचिकाकर्ता अरविंद कुमार गोयल, निवासी रामा लाइफ सिटी, सकरी की करीब 0.1050 हेक्टेयर जमीन ग्राम सकरी, जिला बिलासपुर में स्थित है। इस भूमि का अधिग्रहण पेंड्रीडीह-पथरापाली राष्ट्रीय राजमार्ग 111/130 के निर्माण के लिए किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि भूमि अधिग्रहण के बाद उन्हें न तो मुआवजा दिया गया और न ही कोई अवार्ड पारित किया गया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
90 दिन का दिया गया था आश्वासन (CG High Court)
मामले की सुनवाई के दौरान वर्ष 2024 में शासन की ओर से 90 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता की मांग पर निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया था। इस कथन के आधार पर हाईकोर्ट ने मूल याचिका का निराकरण कर दिया था। लेकिन तय अवधि बीतने के बाद भी मुआवजा नहीं मिलने पर याचिकाकर्ता ने ठलुअक चेयरमैन, रीजनल अफसर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, सदस्य प्रशासन, राजस्व विभाग के सचिव, कलेक्टर और भूमि अधिग्रहण अधिकारी समेत कई अधिकारियों को पक्षकार बनाते हुए अवमानना याचिका दायर की। इसमें ठलुअक को प्रमुख अवमाननाकर्ता बनाया गया था। व्यक्ति का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए: हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना याचिका में उस व्यक्ति का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए, जिस पर आदेश की जानबूझकर अवहेलना का आरोप है। संबंधित अधिकारी को पक्षकार बनाना केवल तकनीकी औपचारिकता नहीं, बल्कि जरूरी कानूनी आवश्यकता है, क्योंकि अवमानना का अधिकार क्षेत्र क्वासी-क्रिमिनल प्रकृति का होता है। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए जिम्मेदार अधिकारी को प्रमुख पक्षकार बनाकर पुनः याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी है।


















