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ऑनलाइन उपस्थिति नहीं देने वाले शिक्षकों पर गिरेगी गाज, डीईओ के सख्त निर्देश से मचा हड़कंप

बिलासपुर। जिले में स्कूलों की व्यवस्था को अनुशासित और जवाबदेह बनाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने सख्त रुख अपनाया है। शिक्षकों और कर्मचारियों की ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर जारी नए निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। डीईओ कार्यालय ने सभी संकुल प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वीएसके (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप के माध्यम से शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए। आदेश का पालन नहीं करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

22 जून तक भेजनी होगी लापरवाहों की सूची

जारी आदेश के अनुसार 16 जून से शुरू हुए नए शिक्षा सत्र में सभी शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की उपस्थिति विद्या समीक्षा केंद्र की बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद जिले के कई स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही है और कुछ संस्थानों में उपस्थिति का आंकड़ा शून्य बताया गया है।

स्थिति को गंभीर मानते हुए डीईओ ने सभी संकुल प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि 22 जून को हर हाल में सभी विद्यालयों में वीएसके ऐप के माध्यम से शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई जाए। जो शिक्षक या कर्मचारी ऐप पर उपस्थिति दर्ज नहीं करेगा, उसका नाम, पदनाम, विद्यालय का नाम और मोबाइल नंबर सहित पूरी जानकारी शाम 5 बजे तक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय को भेजनी होगी। इसके बाद संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

किताबों की स्कैनिंग में देरी पर भी होगी कार्रवाई

डीईओ ने एक अन्य आदेश में पाठ्यपुस्तकों की स्कैनिंग में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई है। विभागीय समीक्षा में सामने आया है कि जिले के अनेक प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और माध्यमिक विद्यालयों में प्राप्त पुस्तकों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

जबकि 16 जून से स्कूलों में नियमित शिक्षण कार्य प्रारंभ हो चुका है। ऐसे में पुस्तकों की स्कैनिंग लंबित रहने से अध्यापन व्यवस्था और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है।

22 जून तक पूरा करना होगा काम

डीईओ ने सभी संकुल प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि 22 जून तक हर हाल में प्राप्त सभी पाठ्यपुस्तकों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग का कार्य पूर्ण कराया जाए। साथ ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से पूर्णता प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी संस्था प्रमुख द्वारा इस कार्य में लापरवाही या उदासीनता बरती जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव तत्काल बीईओ को भेजा जाएगा।

शासन ने जताई नाराजगी

शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा ऑनलाइन उपस्थिति तथा पुस्तक स्कैनिंग जैसे कार्यों में बरती जा रही लापरवाही पर राज्य शासन ने भी गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाने और स्कूलों में जवाबदेही तय करने के लिए इन निर्देशों का कड़ाई से पालन जरूरी है। इसी वजह से इस बार लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सीधे कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।

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