रायपुर। चरित्र शंका को लेकर लगातार प्रताड़ित किए जाने से तंग आकर विवाहिता द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने के मामले में जिला न्यायालय ने पति को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और 500 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर सास को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। मामले की अंतिम सुनवाई पंचम अपर सत्र न्यायाधीश नरेन्द्र कुमार की अदालत में पूरी हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक रितेश अवस्थी ने अदालत को बताया कि धरसींवा थाना क्षेत्र के ग्राम मुर्रा भाठापारा निवासी दंतेश्वरी साहू का विवाह फरवरी 2023 में संजय कुमार साहू से हुआ था।
अभियोजन के अनुसार, 3 जून 2023 को संजय साहू ने थाने में सूचना दी कि उसकी पत्नी ने घर के किचन में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। पुलिस ने सुसाइट नोट भी बरामद किया था। जिसमें पति और सास पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। घटना के बाद मृतका के माता-पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी को पति चरित्र शंका के आधार पर लगातार प्रताड़ित करता था। प्रताड़ना से परेशान होकर वह कुछ समय तक मायके में भी रही थी। बाद में सामाजिक बैठक में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पति संजय साहू और उसकी मां संतोषी बाई साहू के खिलाफ अपराध दर्ज कर विवेचना की। जांच के दौरान घटनास्थल से मिले साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान अदालत में प्रस्तुत किए गए। आरोपी संजय साहू करीब चार माह तक न्यायिक रिमांड पर भी रहा। सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने पति संजय कुमार साहू को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास तथा 500 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, सास संतोषी बाई साहू के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उसे बरी कर दिया।


















