दुर्ग। पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर मोहन नगर थाना पुलिस ने सभी दस्तावेज की जांच एवं पूछताछ के बाद शुक्रवार को अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने राजेश चौहान द्वारा आपराधिक विश्वासघात किए जाने का मामला मानते हुए धारा 316 (2) के तहत अपराध दर्ज किया है। राजेश चौहान ने जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट का काम दिलाने का झांसा देकर परिवादी ठेकेदार से 17.52 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है।
21 जुलाई को न्यायालय ने मोहन नगर थाना प्रभारी को निर्देशित किया था कि विवेचना उपरांत अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत करें एवं प्रकरण का परिणाम अपराधिक पंजी में दर्ज करें। मंगलवार को मिले कोर्ट के आदेश के बाद मोहन नगर पुलिस मामले की जांच में जुट गई थी। नोटिस देकर सभी दस्तावेज मंगवाए गए थे। परिवादी दिनकर विश्वामित्र को आरोपी राजेश चौहान ने खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बताते हुए उद्योगपति नवीन जिंदल के करीबी होने एवं उनसे घरेलू संबंध होने का दावा किया और जिंदल इस्पात मे ट्रांसपोर्ट का काम करने एवं पार्टनर बनाने की बात कही थी। परिवादी को भरोसा दिलाने के उद्देश्य से राजेश चौहान ने कथित वर्क आर्डर भी दिखाया था।

पीड़ित दिनकर विश्वामित्र से राजेश चौहान की मुलाकात उसके एक अन्य दोस्त सरोज कुमार के जरिए हुई थी। बातचीत के दौरान राजेश ने कहा था कि उसकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को उड़ीसा के जिंदल इस्पात लिमिटेड में आयरन और अन्य सामग्री के ट्रांसपोर्ट का बड़ा ठेका मिला हुआ है। अगर वह ट्रक लगाकर इस काम में पार्टनर बनता है तो उसे अच्छा मुनाफा मिलेगा। राजेश चौहान ने उसे भरोसा दिलाने के उद्देश्य से जिंदल इस्पात का कथित वर्क आर्डर और दूसरे दस्तावेज भी दिखाया था। इसको देखकर दिनकर को उसकी बातों पर भरोसा हो गया था और उसे पर विश्वास हो जाने पर 30 जुलाई 2021 को दोनों के बीच इकरारनामा तैयार किया गया था। उसी के दौरान दिनकर ने 2,51,000 रुपए का पहला भुगतान उसे कर दिया था। इसके बाद राजेश चौहान के कहने पर गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी के खाते में दो किस्तों में 15.01 लाख रुपए और ट्रांसफर कर दिए थे। इस तरह आरोपी राजेश चौहान ने कुल 17,52,000 रुपए दिनकर से ले लिए थे।
दिनकर को राजेश चौहान बार-बार भरोसा दिला रहा था कि जल्द ही ट्रांसपोर्ट का काम शुरू हो जाएगा लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी उसे काम नहीं मिला था। जब काफी दिनों तक कोई काम शुरू नहीं हुआ तब दिनकर खुद उड़ीसा स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड पहुंचा। वहां पर कंपनी अधिकारियों से जब उसने चर्चा की तब उसे जानकारी हुई कि राजेश चौहान या उसकी किसी ट्रांसपोर्ट कंपनी को ऐसा कोई ठेका कभी दिया ही नहीं गया है। जो वर्क आर्डर और दूसरे दस्तावेज दिखाए गए थे वह फर्जी थे। धोखाधड़ी का एहसास होने पर परिवादी ने ने न्यायालय का सहारा लिया था। मोहन नगर पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है।


















