रायपुर: छत्तीसगढ़ में अगस्त महीने के दौरान हुई लगातार और झमाझम बारिश का असर अब बांधों और जलाशयों में साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश के जलाशयों में जलभराव की स्थिति काफी बेहतर हो गई है। कई बड़े, मध्यम और छोटे जलाशयों में 100 फीसदी तक जलभराव हो चुका है। ओवरफ्लो की स्थिति वाले कुछ जलाशयों से पानी भी छोड़ा जा रहा है।
एक महीने में 9 फीसदी बढ़ा जल भंडारण
प्रदेश के बांधों में बीते 30 दिनों के दौरान औसत जल भंडारण 88 फीसदी से अधिक हो गया है। 30 जुलाई को यह औसत करीब 79 फीसदी था। यानी अगस्त महीने में ही बांधों के औसत जल भंडारण में करीब 9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कई जलाशय 100 फीसदी भरे
लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई बड़े, मध्यम और छोटे जलाशयों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कई जलाशयों में उनकी कुल क्षमता के मुकाबले 100 फीसदी तक पानी भर चुका है। कुछ जलाशयों में पानी निर्धारित स्तर के करीब पहुंचने या ओवरफ्लो होने की स्थिति में है।
ओवरफ्लो वाले जलाशयों से छोड़ा जा रहा पानी
जलाशयों में लगातार पानी की आवक को देखते हुए ओवरफ्लो की स्थिति वाले जलाशयों से पानी छोड़ा जा रहा है। संबंधित विभाग जलस्तर और पानी की आवक पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि जरूरत के मुताबिक जल निकासी की जा सके।
सभी संभागों में अच्छी बारिश का असर
प्रदेश के सभी संभागों में अच्छी बारिश का असर बांधों के जलस्तर पर देखने को मिल रहा है. हालांकि दो बड़े बांध अब भी 50 फीसदी से कम भरे हैं. इनमें बिलासपुर जिले का अरपा भैंसाझार और रायगढ़ जिले का केलो बांध शामिल हैं. अरपा भैंसाझार में 37.42 फीसदी और केलो बांध में 37.03 फीसदी जलभराव दर्ज किया गया है.
तीन वर्षों की लगभग समान स्थिति
बीते तीन वर्षों के दौरान प्रदेश के बांधों में जल भंडारण की स्थिति लगभग समान रही है. हालांकि इस वर्ष 30 अगस्त की स्थिति पिछले दो वर्षों की तुलना में बेहतर है. वर्ष 2024 में 30 अगस्त को बांधों में औसत जल भंडारण करीब 85 फीसदी था, जबकि वर्ष 2025 में यह 84 फीसदी दर्ज किया गया था. इस वर्ष औसत जल भंडारण 88 फीसदी से अधिक पहुंच गया है.
फुल भरा खारंग जलाशय
बिलासपुर जिले का खारंग जलाशय 100 फीसदी भर चुका है. धमतरी जिले के रविशंकर जलाशय में भी जलभराव 90 फीसदी से अधिक हो गया है. जलाशय में पानी बढ़ने के बाद यहां से पानी छोड़ा गया है. गंगरेल जलाशय में भी पिछले एक माह में जलभराव में करीब 23 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.
31 जुलाई और 30 अगस्त की स्थिति
सीजन के साथ साथ प्रदेश के बांधों के जलस्तर भी बढ़ रहे हैं. जुलाई में अच्छी बारिश का असर बांधों के जलस्तर पर देखने को मिल रहा है. 30 जुलाई को यह औसत करीब 79 फीसदी था. यानी अगस्त में ही औसत जल भंडारण में करीब 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
इस टेबल में देखिए किस बांध में कितने फीसदी पानी बढ़ा
| जलाशय/बांध | 31 जुलाई | 30 अगस्त |
| मिनीमाता बांगो | 83.35% | 90.78% |
| गंगरेल जलाशय | 67.82% | 90.72% |
| तांदुला जलाशय | 66.58% | 78.73% |
| दुधावा | 93.59% | 82.37% |
| सिकासार | 93.97% | 81.43% |
| खारंग जलाशय | 100% | 100% |
| सोंदूर | 68.77% | 84.56% |
| मुरुमसिल्ली | 84.33% | 98.82% |
| कोडार बांध | 87.90% | 100% |
| मनियारी जलाशय | 100% | 100% |
| केलो बांध | 40.45% | 37.03% |
| अरपा भैंसाझार | 25.14% | 37.42% |
| कोडार बांध | 100% | 100% |
मध्यम और लघु जलाशयों की स्थिति भी बेहतर
प्रदेश के ज्यादातर मध्यम और लघु जलाशयों में भी जलस्तर तेजी से बढ़ा है. राजनांदगांव जिले का मोंगरा बैराज इसका उदाहरण है. यहां 22 जुलाई तक जलस्तर शून्य फीसदी के आसपास था, जो बीते आठ दिनों में बढ़कर करीब 76 फीसदी तक पहुंच गया. ज्यादातर मध्यम और लघु जलाशयों में 70 से 99 फीसदी तक जलभराव दर्ज किया गया है. हालांकि कांकेर जिले का मायना जलाशय और रायगढ़ जिले का किंकारीनाला अभी 50 फीसदी जलभराव के स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं.
महासमुंद जिले के कोडार बांध में भी इस बार उल्लेखनीय जलभराव हुआ है. एक माह के दौरान जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई और लंबे समय बाद बांध 100 फीसदी जलभराव के स्तर तक पहुंच गया. जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अच्छी बारिश से न केवल मौजूदा जल संकट की स्थिति बेहतर हुई है, बल्कि आगामी वर्ष के लिए भी पर्याप्त जल भंडारण होने की उम्मीद बढ़ी है.


















