दिशा सालियान केस एक बार फिर सुर्खियों में है. करीब छह साल पुराने इस मामले में CBI ने FIR दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली है. FIR सामने आने के बाद अब एक और सवाल चर्चा में है- क्या CBI की इस FIR में आदित्य ठाकरे को आरोपी बनाया गया है? दरअसल, दिशा सालियान मामले की FIR को CBI की वेबसाइट पर उपलब्ध दूसरी FIRs से मिलाकर देखने पर उसका फॉर्मेट कुछ अलग नजर आता है.

दिशा के पिता सतीश सालियान की शिकायत पर दर्ज यह करीब 10 पेज की FIR कई बिंदुओं में दर्ज की गई है. इसमें संदिग्ध अपराधों के तौर पर आपराधिक साजिश, गैंगरेप, हत्या, सबूत मिटाना या अपराधियों को बचाने के लिए गलत जानकारी देना जैसे आरोपों का जिक्र है. इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों की ओर से कानून की अनदेखी कर आरोपियों को सजा से बचाने और गलत रिकॉर्ड तैयार करने जैसे अपराधों का भी उल्लेख है. FIR में दिशा सालियान की 2020 में हुई मौत से जुड़ी घटना की तारीख और समय का विवरण भी दिया गया है. इसके बाद शिकायतकर्ता सतीश सालियान की जानकारी दर्ज है. FIR के एक कॉलम में यह भी पूछा गया है कि शिकायत दर्ज कराने में कोई देरी हुई या नहीं. इसके सामने ‘No delay’ लिखा गया है.
FIR में क्या कहा गया है?
FIR के 12वें बिंदु में ‘First Information Contents’ के तहत शिकायतकर्ता सतीश सालियान का बयान दर्ज है. इसके बाद 13वें बिंदु में ‘Action Taken’ के तहत बताया गया है कि उपलब्ध जानकारी से संबंधित धाराओं में अपराध सामने आने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई. यहीं से FIR को लेकर चर्चा और दिलचस्प हो जाती है. क्योंकि CBI की वेबसाइट पर उपलब्ध कुछ दूसरी FIRs को देखें तो उनमें आरोपी व्यक्तियों का विवरण अलग तरीके से दर्ज दिखाई देता है. उदाहरण के लिए पंजाब नेशनल बैंक घोटाला मामले की CBI FIR करीब 10 पेज की है. उसके शुरुआती हिस्से में भी संदिग्ध अपराध, शिकायतकर्ता और FIR की जानकारी दर्ज है. लेकिन इसके साथ लगाए गए एनेक्सचर में आरोपियों की जानकारी दी गई है. इसमें नीरव मोदी समेत अन्य ज्ञात और अज्ञात व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है. मतलब उस FIR में आरोपी पक्ष की जानकारी अलग से सामने आती है. इसी तरह पूर्व IRS अधिकारी सचिन सावंत से जुड़े भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले की CBI FIR को देखें तो उसमें FIR के शुरुआती हिस्से में ही चार आरोपियों का विवरण दिया गया है. इसमें सचिन सावंत के साथ तीन अन्य सह-आरोपियों की जानकारी दर्ज है.
यहीं दिशा सालियान मामले की FIR का फॉर्मेट अलग दिखाई देता है. इसमें आरोपों और शिकायतकर्ता का विवरण तो है, लेकिन उसी तरह किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर अलग कॉलम या एनेक्सचर में नामित नहीं किया गया है.
FIR में किन लोगों के जांच की बात?
FIR की कॉपी में कहा गया है कि दिशा सालियान की मौत से जुड़े मुख्य अपराध, कथित आपराधिक साजिश, बाद में बनाई और प्रचारित की गई कथित झूठी आत्महत्या की कहानी और सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें कथित हेरफेर की जांच जरूरी है. इस संदर्भ में जिन लोगों की भूमिका की जांच की बात FIR में कही गई है, उनमें आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, तत्कालीन DCP विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, API अशोक देवढे, PI जगदेव कलापाड़, PI शैलेंद्र नागरकर, PI चिमाजी अढ़ाव, PI अर्जुन रजाने और मालवानी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी शामिल हैं. इसके अलावा FIR में देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ, डॉ. संजय जाधव, कलिना फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी से जुड़े अधिकारी और N.P. भाले का भी जिक्र है. रीजेंट गैलेक्सी बिल्डिंग के सुरक्षा गार्डों में सुशील कुमार यादव और शिवमुराद गौतम उर्फ मुन्ना के नाम भी दर्ज हैं. इनके अलावा प्रीति राणे, प्रवीण राणे, अंकिता सातुर, इंद्रनील वैद्य, दीप अजमेरा, हिमांशु शिखारे, रेशा पडवाल, सतवंत सिंह, नावेद मुजावर और प्रियेश राणे समेत SIT के वरिष्ठ सदस्यों और उन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की बात कही गई है, जिनकी निगरानी में जांच हुई थी. FIR में अन्य अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया है.

















