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गणेश विसर्जन के दिन पंचक का संयोग, क्या इस दौरान कर सकते हैं बप्पा का विसर्जन?

गणपति बप्पा मोरया। महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी की धूम और ये जयकारा खूब सुनाई पड़ता है। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई गई है और इसी के साथ लोगों ने पंडाल से लेकर घरों में गणपति की मूर्ति की स्थापना की। अब महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश के लगभग हर कोने में बप्पा का उत्सव लोग धूमधाम से मनाते है। हालांकि अगर सामान्य तौर से देखा जाए तो 23 सितंबर यानी आज के दिन गणेश महोत्सव का दिन पूरा हुआ है लेकिन गणपति का विसर्जन आज ना होकर 25 सितंबर को किया जाना है और इस दिन पंचक का साया भी लग रहा है।

ऐसे में गणपति विसर्जन को लेकर कई तरह के सवाल मन में हैं। तो चलिए जानते हैं कि आखिर इस बार 10 दिन ना होकर ये उत्सव 12 दिन का क्यों है और क्या विसर्जन पंचक के रहते किया जा सकता है?

आज क्यों नहीं होगा गणपति विसर्जन

पंचांग तिथि के हिसाब से गणेश महोत्सव की शुरुआत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ होती है। वहीं इसका समापन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है। ऐसे में सिर्फ 10 दिन पूरे होने पर गणपति विसर्जन की तिथि नहीं तय की जात सकती है। पंचांग के हिसाब से देखकर तय किया जाता है कि चतुर्दशी वाली तिथि किस दिन पड़ रही है। पंचांग के हिसाब से आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। इसके बाद त्रयोदशी और फिर चतुर्दशी तिथि आएगी।

25 सितंबर को है चतुर्दशी तिथि

भाद्रपद शुक्ल पक्ष के चतुर्दशी तिथि की शुरुआत कल यानी 24 सितंबर की रात 11 बजकर 17 मिनट से होगी। ये तिथि 25 सितंबर को रात में 11 बजकर 8 मिनट तक ये तिथि होगी। ऐसे में उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए 25 सितंबर के दिन ही अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी और इसी दिन विशेष मुहूर्त के दौरान गणपति विसर्जन किया जाएगा।

पंचक में कर सकते हैं गणपति विसर्जन?

पंचक के साया को लेकर लोगों में कई तरह का कन्फ्यूजन बनने लगता है। हालांकि पंडित नरेंद्र उपाध्याय जी के अनुसार पंचक का साया जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है और उसकी अस्थियां जलाई जाती हैं उसमें माना जाता है। पहले तो ये देवताओं पर लागू नहीं होता है। दूसरी बात ये है किसी की मूर्ति जलाई नहीं जा रही है विसर्जन हो रहा है।

पंडित जी के अनुसारविसर्जन में जो शरीर होता है वो जल के हवाले किया जाता है। यो यहां पर पंचक का कोई भी मतलब नहीं है। विसर्जन भी देव विसर्जन है। तो पंचक को कोई भी मतलब नहीं है। विसर्जन बिल्कुल करें इसमें पंचक लागू नहीं होगा। यानी साफ है कि गणपति विसर्जन पर पंचक का कोई भी असर नहीं होगा। ऐसे में ये बिना किसी डर के किया जा सकता है।

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