ब्रेकिंग खबरें

छत्तीसगढ़ट्रेंडिंगराष्ट्रीय

बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास में देरी पर हाईकोर्ट नाराज, अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर एयरपोर्ट पर हवाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) से ठोस कार्रवाई की जानकारी मांगी है। मुख्य न्यायाधीश कृष्णा राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले में केवल पत्राचार करके समय नहीं बिताया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने जोर दिया कि एयरपोर्ट के विकास के लिए जिम्मेदारी तय करने के साथ जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। अदालत ने राज्य सरकार और AAI से इस दिशा में की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।

 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बिलासपुर एयरपोर्ट को 4सी श्रेणी में उन्नत करने के लिए किए गए प्रयासों पर तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. वहीं, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को एयरपोर्ट का प्रबंधन, संचालन और विकास अपने हाथ में लेने के प्रस्ताव पर अब तक हुई कार्रवाई का विवरण देना होगा. मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित की गई है.

104 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर निर्णय नहीं

सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि बिलासपुर एयरपोर्ट के रनवे विस्तार के लिए 63 करोड़ रुपए और नए वायु यातायात नियंत्रण टावर के लिए 41 करोड़ रुपए का प्रस्ताव मंत्रालय को भेजा जा चुका है. इसके बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन कार्यों को राज्य सरकार कराएगी या भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण. जिम्मेदारी तय नहीं होने से विकास कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं.

गर्मियों में यात्रियों की संख्या घटाने की मजबूरी

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि मौजूदा एयरपोर्ट एटीआर विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है. हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने इस दावे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि रनवे छोटा होने के कारण गर्मियों में विमान में 72 यात्रियों के स्थान पर केवल 52 यात्रियों को ले जाना पड़ता है. इससे विमानन कंपनियों के लिए परिचालन भी कम आकर्षक हो जाता है.

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बिलासपुर का रनवे अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट से भी छोटा है. उन्होंने कहा कि रनवे की लंबाई 1500 मीटर से कम होने के कारण विमान अपनी पूरी यात्री क्षमता के साथ उड़ान नहीं भर पा रहे हैं.

एएआई से भी मांगा जवाब

पिछली सुनवाई में 29 सितंबर को हाईकोर्ट ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी से शपथ पत्र मांगा था. याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इसके बावजूद प्राधिकरण की ओर से अपेक्षित वरिष्ठ अधिकारी के बजाय कनिष्ठ अधिकारी का शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया.

दस्तावेजों के अनुसार, राज्य सरकार बिलासपुर के साथ अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट को भी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंपने पर विचार कर रही है. हालांकि, प्राधिकरण ने स्पष्ट सहमति देने के बजाय राज्य सरकार से भूमि, खसरा-वार विवरण, स्वामित्व और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मांगी है.

हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से हवाई सुविधा विस्तार के लिए ठोस पहल की अपेक्षा जताई है. राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता अनुमेह श्रीवास्तव ने पक्ष रखा.

What's your reaction?

Related Posts