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बस्तर की चापड़ा चटनी के मुरीद हुए डेनमार्क के पर्यटक, स्वाद चखते ही बोले- ‘वॉव’

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती और अनूठी जनजातीय संस्कृति अब विदेशी पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसी कड़ी में डेनमार्क से आए चार पर्यटक दंतेवाड़ा जिले के झिरका गांव पहुंचे। यहां उन्होंने प्रसिद्ध झारालावा जलप्रपात का भ्रमण किया और बस्तर की पारंपरिक चापड़ा चटनी का स्वाद चखा। चटनी का अनोखा स्वाद लेते ही पर्यटकों के मुंह से ‘वॉव’ निकल पड़ा।

झारालावा जलप्रपात की खूबसूरती ने मोहा मन

डेनमार्क से आए चारों पर्यटकों ने झिरका गांव पहुंचकर झारालावा जलप्रपात का भ्रमण किया। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और शांत वातावरण ने उनका ध्यान आकर्षित किया। पर्यटकों ने बस्तर के प्राकृतिक नजारों को करीब से देखा और इस खूबसूरत अनुभव का आनंद लिया।

चापड़ा चटनी का स्वाद चखकर बोले ‘वॉव’

इस यात्रा का सबसे खास आकर्षण बस्तर की पारंपरिक चापड़ा चटनी रही। विदेशी मेहमानों ने स्थानीय जनजातीय व्यंजन का स्वाद लिया। चटनी का अनूठा स्वाद चखने के बाद उन्होंने ‘वॉव’ कहकर अपनी खुशी जाहिर की। दरअसल, चापड़ा चटनी बस्तर की पारंपरिक खाद्य संस्कृति का खास हिस्सा है। इसे लाल चींटियों और उनके अंडों से तैयार किया जाता है। इसका खट्टा और तीखा स्वाद इसे दूसरी चटनियों से अलग बनाता है।

 झिरका गांव में विदेशी पर्यटकों के पहुंचने पर स्थानीय पर्यटन समिति और ग्रामीणों ने उनका आत्मीय स्वागत किया. भ्रमण के दौरान पर्यटकों ने जलप्रपात की प्राकृतिक सुंदरता, आसपास की हरियाली और ग्रामीण परिवेश का आनंद लिया. इसके साथ ही उन्होंने बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान और स्थानीय जीवनशैली को करीब से समझा.

चापड़ा चटनी बनाने की विधि भी जानी

पर्यटकों ने बस्तर की प्रसिद्ध चापड़ा चटनी बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया को भी देखा. ग्रामीणों से इसे तैयार करने की विधि समझी और इसके अनूठे स्वाद का आनंद लिया. इसके अलावा उन्होंने झिरका गांव का भ्रमण कर ग्रामीण रहन-सहन और पारंपरिक गतिविधियों की जानकारी ली. पर्यटकों ने स्थानीय स्तर पर महुआ तैयार करने की प्रक्रिया को भी समझा तथा इससे जुड़ी परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जाना.

ग्रामीण पर्यटन को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान

झिरका गांव में पहली बार डेनमार्क के चार विदेशी पर्यटकों का पहुंचना क्षेत्र के ग्रामीण पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकल रहे बस्तर के दूरस्थ इलाकों में पर्यटन की संभावनाओं को इससे नई दिशा मिल सकती है. झारालावा जलप्रपात की प्राकृतिक छटा, जनजातीय परंपराएं और स्थानीय व्यंजन इस क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विशिष्ट बनाते हैं.

 इस पहल से दंतेवाड़ा के उन पर्यटन स्थलों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है, जो अब तक मुख्यधारा के पर्यटन मानचित्र पर अधिक चर्चित नहीं रहे हैं. पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण पर्यटन समितियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं.

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