बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के लोरमी उपसंभाग में करोड़ों रुपये की सरकारी राशि के दुरुपयोग की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से 181 निजी और रसूखदार उपभोक्ताओं के 95.83 लाख रुपये के बकाया बिजली बिल को शासकीय पेयजल योजना के खाते में समायोजित कर भुगतान करने की तैयारी की गई। शिकायत के बाद कथित फर्जी समायोजन को रोक लिया गया, लेकिन मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार हर वर्ष शासकीय पेयजल कनेक्शनों के बिजली बिल के भुगतान के लिए करोड़ों रुपये उपलब्ध कराती है। इसी क्रम में कार्यपालक निदेशक (राजस्व), रायपुर ने मुंगेली संभाग के लिए 50.57 करोड़ रुपये के समायोजन की मंजूरी दी थी। आरोप है कि इसी व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए लोरमी कार्यालय में फर्जीवाड़े की योजना बनाई गई।
निजी उपभोक्ताओं को कागजों में बनाया गया ‘सरपंच’
दस्तावेजों के अनुसार 21 जून 2023 को 181 घरेलू, व्यावसायिक, कृषि और अस्थायी बिजली कनेक्शनों का उपभोक्ता वर्ग, टैरिफ और नाम बदलकर उन्हें फर्जी तरीके से “सरपंच ग्राम पंचायत” के नाम पर दर्ज कर दिया गया। इसके बाद 29 और 31 जुलाई 2023 को इन उपभोक्ताओं के 95.83 लाख रुपये के बकाया बिल को शासकीय पेयजल मद से समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
बताया जा रहा है कि भुगतान से पहले शिकायत मिलने पर पूरे मामले का खुलासा हो गया और कथित फर्जी समायोजन वापस ले लिया गया। हालांकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह अपने आप में गंभीर वित्तीय अनियमितता है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
छोटे कर्मचारी पर एफआईआर, अधिकारियों पर नहीं कार्रवाई
मामले को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि वर्ष 2023 में 10 उपभोक्ताओं के बिजली बिल की राशि के कथित गबन के आरोप में चतुर्थ श्रेणी लाइन कर्मचारी विजय मारकण्डे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया था। उन पर लगभग 13 लाख रुपये के गबन का आरोप था।
इसके विपरीत, इस मामले में अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर शिकायतकर्ताओं ने दोहरे मापदंड का आरोप लगाया है। यह भी दावा किया गया है कि एई सौरभ विश्वकर्मा का नाम पहले भी बीपीएल टैरिफ से जुड़े एक मामले में सामने आया था, जहां उन्हें केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था।
कंपनी का पक्ष
विद्युत वितरण कंपनी के कार्यपालक निदेशक ए.के. अंबष्ट ने कहा कि ग्राम पंचायत की राशि को निजी उपभोक्ताओं के बिल में समायोजित करने का मामला सामने आया था, लेकिन भुगतान होने से पहले ही शिकायत मिल गई थी और भुगतान रोक दिया गया। इसी आधार पर एई और जेई के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तथा उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि बाबू स्तर के कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार कार्यपालन अभियंता (ईई) स्तर पर होता है, इसलिए उस संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है।


















