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CBSE में बड़ा विवाद: धुंधली कॉपियां और गायब पन्नों से मचा हड़कंप, जांच की मांग तेज

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठे विवाद के बाद बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। शिक्षा मंत्रालय ने OSM से जुड़े टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में सामने आई खामियों को लेकर आंतरिक स्तर पर जांच और सख्ती शुरू कर दी है। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सीबीएसई की ओर से अब तक दिए गए स्पष्टीकरण असंतोषजनक रहे हैं, जिसके बाद अब बोर्ड के भीतर कई स्तरों पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होने और उन पर गाज गिरने की पूरी संभावना है।

क्या है पूरा विवाद और कैसे हुई जांच की शुरुआत?

यह पूरा विवाद सीबीएसई के ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM)’ सिस्टम से जुड़ा हुआ है। शिक्षा मंत्रालय ने हैदराबाद की कंपनी ‘कोएम्प्ट एडु टेक’ को इस सिस्टम का ठेका दिए जाने को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके अलावा री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) पोर्टल में पाई गई सुरक्षा खामियों पर भी जवाब मांगा गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विवाद ने तब तूल पकड़ा जब यह आरोप लगे कि कोएम्प्ट को सफल बोलीदाता बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया के कई राउंड्स में योग्यता और तकनीकी मानकों में मनमाने बदलाव किए गए। मंत्रालय का मानना है कि यह सिर्फ एक तकनीकी नाकामी नहीं है, बल्कि सिस्टम के भीतर की बड़ी चूक है।

OSM सिस्टम पर क्यों उठे सवाल?

CBSE ने 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में पहली बार OSM यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया था। इसके तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल माध्यम से जांचा गया। लेकिन सिस्टम लागू होने के बाद कई तरह की तकनीकी और प्रक्रियागत समस्याओं के आरोप सामने आए। जिसके बाद OSM सिस्टम को लेकर टेंडर प्रक्रिया, स्कैनिंग क्वालिटी और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

छात्रों ने किन खामियों की शिकायत की?

मामला तब और गरमा गया जब री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया के दौरान छात्रों की तरफ से लगातार शिकायतें आने लगीं। छात्रों ने पोर्टल में कई तरह की गड़बड़ियों की जानकारी दी:

स्क्रीन पर धुंधली (ब्लर) आंसर शीट दिखना।

आंसर शीट से पन्ने गायब होना।

स्कैन की गई कॉपी का मिसमैच होना (अलग कॉपी दिखना)।

री-इवैल्यूएशन के दौरान पोर्टल पर बार-बार तकनीकी दिक्कतें (ग्लिच) आना।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, OSM सिस्टम के शुरुआती इस्तेमाल के दौरान करीब 20 मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के मिक्स-अप की घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा स्कैनिंग गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं के कारण 13,000 से ज्यादा कॉपियों का मूल्यांकन अंततः मैन्युअल तरीके से करना पड़ा। इसी के बाद शिक्षा मंत्रालय ने मामले की समीक्षा शुरू की है।

टेंडर प्रक्रिया पर क्यों उठे सवाल?

रिपोर्टों के अनुसार, OSM सिस्टम के लिए CBSE को तीन बार टेंडर जारी करने पड़े थे। शुरुआती दो प्रयासों में या तो कोई बोली नहीं मिली या तकनीकी मानदंडों पर योग्य कंपनी नहीं मिल सकी। बाद में तीसरे टेंडर में कुछ शर्तों में बदलाव किए गए, जिसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी। इन्हीं बदलावों को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आरोप लगाया था कि टेंडर की कुछ शर्तों में बदलाव से एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचा। हालांकि CBSE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें भ्रामक बताया था और कहा था कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत अपनाई गई।

शिक्षा मंत्री ने भी मानी थीं खामियां

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में स्वीकार किया था कि OSM प्रणाली में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा था कि छात्रों की सभी शिकायतों का समाधान किया जाएगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

मंत्रालय की नजर में पूरा मामला

अब शिक्षा मंत्रालय ने टेंडर प्रक्रिया और डिजिटल मूल्यांकन तंत्र से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। मंत्रालय का मानना है कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी वजह से CBSE के भीतर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है और आने वाले दिनों में कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

खामियां दूर करने के लिए IIT विशेषज्ञों की एंट्री

विवाद के बीच एथिकल हैकर्स और साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने भी सीबीएसई के डिजिटल इवैल्यूएशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरियों को उजागर किया है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह खामी इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि सीबीएसई के पास अभी भी आंसर शीट और परीक्षा रिकॉर्ड सहेजने के लिए एक सुव्यवस्थित ‘डिजिटल रिपॉजिटरी आर्किटेक्चर’ नहीं है। अब हालात को संभालने और पोर्टल की तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने IIT के विशेषज्ञों को काम पर लगाया है। ये एक्सपर्ट्स री-इवैल्यूएशन पोर्टल के आर्किटेक्चर का ऑडिट करेंगे और साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने का काम करेंगे।

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