रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सीजीपीएससी (CGPSC) भर्ती घोटाले में बुधवार सुबह सीबीआई की टीम ने कार्रवाई की है। भिलाई के सेक्टर-10 स्थित रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जेके ध्रुव के निवास पर तड़के दो बजे जांच अधिकारियों की टीम दो गाड़ियों में पहुंची। फिलहाल सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच दस्तावेजों की जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी भी जांच एजेंसी (CBI,ED या EOW) ने इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
आयोग के अध्यक्ष ने रची साजिश
मामला साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई धांधली और पेपर लीक से जुड़ा है। सीबीआई (CBI) की जांच में सामने आया है कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया। आरोप है कि तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर की मिलीभगत से प्रश्नपत्र लीक किए गए। कोलकाता की प्रिंटिंग कंपनी से रायपुर आए प्रश्नपत्रों की गोपनीय कॉपियां बनाई गईं और रसूखदारों को बांटी गईं। इसके एवज में एक औद्योगिक समूह द्वारा सीएसआर (CSR) मद के तहत टामन सिंह की पत्नी के एनजीओ को 45 लाख रुपए ट्रांसफर किए जाने की बात भी सामने आई है। इस धांधली का असर यह हुआ कि CGPSC 2021 के टॉप-20 अभ्यर्थियों में से 13 से अधिक लोग अधिकारियों, नेताओं और करीबियों के रिश्तेदार पाए गए। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी हैं।
घोटाले से जुड़ी टाइमलाइन
- जनवरी 2021- कोलकाता की प्रिंटिंग कंपनी का कर्मचारी सात सेट प्रश्नपत्र लेकर रायपुर पहुंचा, जहां आंतरिक मिलीभगत से पेपर कॉपी किए गए।
- 13 फरवरी 2022- सीजीपीएससी 2021 के 171 पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा (Pre) आयोजित हुई, जिसमें 2,565 अभ्यर्थी सफल हुए।
- 26-29 मई 2022- मुख्य परीक्षा (Mains) का आयोजन किया गया, जिसमें से 509 अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई किया।
- 11 मई 2023- अंतिम चयन सूची जारी हुई, जिसमें रसूखदारों के रिश्तेदारों के नाम टॉप पर आने के बाद भारी विवाद और विरोध शुरू हुआ।
- वर्ष 2024 – 2025-मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। छापेमारी में कई आपत्तिजनक साक्ष्य मिले और चार्जशीट दाखिल की गई।अब तक हुई गिरफ्तारियां
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले में सीबीआई ने आयोग के शीर्ष पदाधिकारियों से लेकर पेपर लीक का लाभ उठाने वाले अभ्यर्थियों और उनके मददगारों तक कुल 12 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों को मुख्यतः तीन चरणों में अंजाम दिया गया है।
प्रथम चरण की गिरफ्तारियां – (नवंबर 2024)
- टामन सिंह सोनवानी- सीबीआई ने मामले की जांच हाथ में लेते ही सबसे पहले घोटाले के मुख्य साजिशकर्ताओं पर हाथ डाला। सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया गया। इन पर अपने पद का दुरुपयोग कर भतीजों और करीबियों को डिप्टी कलेक्टर व डीएसपी बनाने का मुख्य आरोप है।
श्रवण कुमार गोयल: बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर। इन पर आरोप है कि इन्होंने मोटी रकम देकर अपने बेटे और बहू के लिए प्रश्नपत्र हासिल किए थे।
द्वितीय चरण की गिरफ्तारियां (जनवरी 2025)
इस चरण में उन अभ्यर्थियों और सहयोगी अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया जिन्होंने अनुचित लाभ लिया या उसे प्रोसेस किया।
- ललित गनवीर: तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक, जिन पर पेपर लीक नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है।
- नितेश सोनवानी: पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के भतीजे (चयनित डिप्टी कलेक्टर)।
- साहिल सोनवानी: पूर्व चेयरमैन के रिश्तेदार (चयनित डिप्टी एसपी)।
- शशांक गोयल: उद्योगपति श्रवण गोयल के बेटे (चयनित डिप्टी कलेक्टर)।
- भूमिका कटियार (गोयल): श्रवण गोयल की बहू (चयनित डिप्टी कलेक्टर)।
तृतीय चरण की गिरफ्तारियां (सितंबर 2025)
सीबीआई ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए आयोग के प्रशासनिक तंत्र और अन्य रसूखदार लाभार्थियों पर कार्रवाई की।
- जीवन किशोर ध्रुव (जेके ध्रुव): सीजीपीएससी के तत्कालीन सचिव और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी।
- आरती वासनिक: आयोग की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक, जिनकी प्रश्नपत्रों को गोपनीय रूप से लीक कराने में केंद्रीय भूमिका पाई गई।
- सुमित ध्रुव: तत्कालीन सचिव जेके ध्रुव के बेटे (चयनित डिप्टी कलेक्टर)।
- निशा कोसले: पूर्व चेयरमैन के भाई की बहू (चयनित डिप्टी कलेक्टर)।
- दीपा आडिल: चयनित जिला आबकारी अधिकारी।



















