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बीएसएफ को जमीन मिलने से पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश बॉर्डर की सुरक्षा होगी और मजबूत, नहीं हो सकेगी घुसपैठ

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल के माध्यम से भारत में घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी और अन्य घुसपैठियों की अब खैर नहीं होगी। ममता बनर्जी की हार के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी बीजेपी सरकार की पहली कैबिनेट में बीएसएफ को 45 दिनों में जमीन देने की घोषणा के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय और बीएसएफ ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

जमीन न मिलने से नहीं हो सकी थी फेंसिंग

इस राज्य में जमीन ना मिलने की वजह से बांग्लादेश से लगते 456 किलोमीटर से अधिक की दूरी वाले बॉर्डर एरिया में अभी कंटीले तार वाली फेंसिंग नहीं लग सकी थी। लेकिन, अब इस काम में तेजी आएगी। जिससे बांग्लादेश की तरफ से होने वाली घुसपैठ पर रोक लग सकेगी।

कितने किलोमीटर का है भारत-बांग्लादेश बॉर्डर

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत-बांग्लादेश बॉर्डर 4096.7 किलोमीटर लंबा है। इसमें सबसे लंबा 2216.7 किलोमीटर लंबा बॉर्डर पश्चिम बंगाल राज्य से लगता है। जबकि त्रिपुरा से 856, मेघालय से 443, मिजोरम से 318 और असम से 262 किलोमीटर लंबा बॉर्डर इलाका लगता है।

सबसे बड़ी समस्या किस बॉर्डर के साथ

घुसपैठ को लेकर सबसे बड़ी समस्या पश्चिम बंगाल से लगते बांग्लादेश बॉर्डर पर ही आ रही थी। जहां 2216.7 किलोमीटर बॉर्डर में से 1647.7 किलोमीटर बॉर्डर एरिया में तो कंटीले तार वाली बाड़ लगा दी गई, लेकिन बाकी बचे 569 किलोमीटर सीमा इलाके में बाड़ नहीं लग पाई है। घुसपैठ के अधिकतर प्रयास इन्हीं बिना फेंसिंग वाले खुले बॉर्डर एरिया से होते हैं।

क्यों नहीं लग पाई थी फेंसिंग

मंत्रालय के ही मुताबिक, बिना फेंसिंग के बाकी बचे इस 569 किलोमीटर एरिया में से करीब 113 किलोमीटर बॉर्डर एरिया ऐसा है। जहां नदी-तालाब और अन्य भौगोलिक कारणों की वजह से किसी भी सूरत में बाड़बंदी नहीं की जा सकती। इस वजह से बाकी बचे 456 किलोमीटर एरिया में फेंसिंग लगाई जानी थी।

ममता सरकार ने नहीं दी जमीन

इस एरिया में पिछले साल काफी प्रयास के बाद करीब 78 किलोमीटर जमीन ममता सरकार द्वारा केंद्र सरकार को दी गई थी, लेकिन बाकी बची 378 किलोमीटर लैंड ममता सरकार द्वारा बीएसएफ को नहीं दी गई। जिसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी 10 से अधिक बार ममता सरकार को पत्र लिखे गए थे। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार से जमीन नहीं मिली।

केंद्र ने दिए पैसे लेकिन टीएमसी सरकार ने नहीं दी जमीन

इसमें भी गंभीर बात यह सामने आई कि 181 किलोमीटर लैंड के लिए केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार को पैसा दिए जाने के बाद भी जमीन आवंटित नहीं की गई। ताकि इस पर फेंसिंग लगाई जा सके। अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कैबिनेट द्वारा 45 दिनों में जमीन देने की घोषणा करने से पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश बॉर्डर पर बाड़बंदी होने का रास्ता साफ हो गया है।

बॉर्डर पर सुरक्षा के लिए होगी खास व्यवस्था

सूत्रों का कहना है कि यहां स्मार्ट एंटी कट फेंसिंग लगाई जाएगी। सुरक्षा के लिए एआई तकनीक से लैस कैमरे और ड्रोन की भी मदद ली जाएगी। इससे बीएसएफ में भी 12 से 15 बटालियन और बनाने की जरूरत पड़ेगी। बॉर्डर पर बीओपी भी और बनाई जाएंगी।

फेंसिंग ना होने से बांग्लादेश की तरफ से बढ़ी घुसपैठ

जमीन ना मिलने से यहां फेंसिंग नहीं हो पा रही थी। इस वजह से घुसपैठ भी बढ़ रही थी। आंकड़ों पर गौर करें तो 2023 में 1547 और 2024 में 1694 घुसपैठिए बांग्लादेश से लगते पश्चिम बंगाल बॉर्डर से गिरफ्तार किए गए। इनमें 2025 में और बढ़ोतरी हुई। इनमें मवेशियों और ड्रग्स की भी तस्करी हो रही थी। लेकिन अब जमीन मिलने से इस पूरे इलाके में जल्द बाड़बंदी की जा सकेगी। जिसके बाद इस तरह की अवैध घुसपैठ बंद हो जाएगी। हालांकि, ऐसा नहीं है कि इस बिना बाड़बंदी वाले एरिया में बीएसएफ की निगरानी नहीं है। लेकिन फेंसिंग होने के बाद यह प्रॉपर हो सकेगी, जिसमें कहीं से भी घुसपैठ होने की आशंका बेहद कम हो जाएगी।

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