रायपुर: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 16,000 संविदा स्वास्थ्य कर्मी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 22 दिनों से हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए कर्मचारियों ने नवा रायपुर में से जल सत्याग्रह शुरू करने की घोषणा की है।
20 दिन से ठप स्वास्थ्य सेवाएं
18 अगस्त से शुरू हुई इस हड़ताल ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में, को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटक गए हैं और मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं कर रही, जिसके चलते अब वे जल सत्याग्रह जैसे कड़े कदम उठाने को मजबूर हैं। रायपुर जिला NHM संघ के संगठन मंत्री अमन दास ने कहा कि केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस समाधान की जरूरत है।
बर्खास्तगी ने बढ़ाया आक्रोश
हड़ताल के दौरान सरकार ने 25 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था, जिसके जवाब में कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफे सौंपे। हालांकि, इन इस्तीफों को अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। इस कार्रवाई ने कर्मचारियों के आक्रोश को और भड़का दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो विधानसभा घेराव के साथ-साथ मंत्रियों और विधायकों के आवासों के बाहर भी उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे।
सरकार और कर्मचारियों में टकराव
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि कर्मचारियों की कई मांगों पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन कर्मचारी संपूर्ण समाधान की मांग पर अड़े हैं। सरकार हड़ताली कर्मचारियों पर काम पर लौटने का दबाव बना रही है, जबकि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। संगठन ने साफ कर दिया है कि जल सत्याग्रह आंदोलन का अगला चरण है और यह लंबा चल सकता है।


















