ब्रेकिंग खबरें

छत्तीसगढ़

Chhattisgarh News: जल जीवन मिशन के काम ठप गांवों में पानी के लिए हाहाकार

रायपुर। गर्मी बढ़ने के साथ ही प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के लिए हाहाकार मचने लगा है। जिन गांवों में मिशन का काम अधूरा है, वहां तो लोग पानी के लिए परेशान हैं ही, अब उन स्थानों से भी शिकायतें आने लगी हैं, जहां जल जीवन मिशन योजना पूरी होने के दावे हैं। इधर, निर्माण कार्यों के भुगतान न होने के कारण मिशन का काम लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। Chhattisgarh News

प्रदेश में ठप पड़े जल जीवन मिशन के कार्यों में नए वित्तीय वर्ष से गति आने की उम्मीद जताई जा रही थी। केंद्र सरकार से दी गई राशि को मिलाकर भुगतान करने की सुगबुगाहट थी लेकिन इस मामले में कोई निर्णय नहीं हो पाया। केन्द्र सरकार द्वारा बीते मार्च माह में जारी किए गए 536 करोड़ की राशि अब तक जिलों को आबंटित नहीं हुई है। निर्माण एजेंसियां राज्य बजट की प्रावधानित राशि और केन्द्र से मिली राशि को मिलाकर भुगतान की बाट जोह रहे हैं। इधर जल जीवन मिशन कार्यालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया कि केन्द्र से जारी की गई राशि प्रतिपूर्ति के तौर पर दी गई है। इससे ही सीधे तौर पर संकेत मिल रहे हैं कि फिलहाल भुगतान का कोई इरादा नहीं है। इधर कई स्थानों से जलसंकट की शिकायतें आने लगी हैं, जहां योजना पूरी होने के दावे किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर तो पूर्व में ही भुगतान हो चुका है। सिंगल विलेज योजनाओं वाले छोटी एजेंसियों के सामने सबसे ज्यादा दिक्कतें आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब पेयजल संकट गहराने लगा है। इधर सूत्र दावा करते हैं कि अगर इस राशि का उपयोग अन्य कार्यों में किया गया तो मिशन की मूल योजनाओं पर विपरीत असर पड़ सकता है। भुगतान में लेटलतीफी के चलते असंतोष उभरकर सामने आने लगा है। वहीं अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। कई परियोजनाओं में ठहराव आ गया है। ज्यादातर स्थानों में काम बंद हो चुके हैं। वहीं मिशन द्वारा वित्तीय अड़चनों और परियोजना की प्रगति के मामले में जल्दी ही फैसले लेने का दबाव है।

यही हालात रहे तो पूर्ण विराम (Chhattisgarh News)

विभाग में ही कुछ अफसर दबी जुबान में स्वीकार करते हैं कि मौजूदा हालात बने रहे तो मिशन के कार्यों पर सौ फीसदी पूर्ण विराम लग जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। भूजल स्तर नीचे जाने से ग्रामीणों को जूझना पड़ रहा है। कई स्थानों पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता में नजर नहीं आ रहा है।

What's your reaction?

Related Posts