दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में सूपड़ा साफ होने के बाद टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। भारत ने बुधवार को गुवाहाटी में दूसरे टेस्ट में 408 रनों से हार का सामना किया। यह भारत की टेस्ट क्रिकेट में रनों के लिहाज से सबसे बड़ी हार है। दक्षिण अफ्रीका ने भारत में 25 सालों के बाद टेस्ट सीरीज पर कब्जा जमाया है। शर्मनाक प्रदर्शन के बाद गंभीर बैकफुट पर हैं। उन्होंने कहा कि मेरा भविष्य का फैसला भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) को तय करना है। हालंकि, कोच ने साथ ही अपनी उपलब्धियां भी गिनाई।
गंभीर ने दक्षिण अफ्रीका सीरीज समाप्त होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”मेरे भविष्य का फैसला बीसीसीआई को करना है। मैंने पहले भी कहा है, भारतीय क्रिकेट जरूरी है, मैं ज़रूरी नहीं हूं। लेकिन मैं वही व्यक्ति हूं जिसने इंग्लैंड में आपको अनुकूल परिणाम दिलाए और मैं चैंपियंस ट्रॉफी में भी कोच था।” बता दें कि भारत ने इस साल की शुरुआत में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी जबकि इंग्लैंड में 2-2 से टेस्ट सीरीज ड्रॉ कराई। प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में गंभीर ने कहा कि 0-2 से सीरीज हार के लिए भारतीय टीम के हर खिलाड़ी जिम्मेदार है लेकिन शुरुआती उनसी होती है।
कोच ने कहा, ”दोष सभी का है और इसकी शुरुआत मुझसे होती है। हमें बेहतर खेल दिखाना होगा। पहली पारी में एक समय हमारा स्कोर एक विकेट पर 95 रन था जो सात विकेट पर 122 रन हो गया। यह स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने कहा, ”आप किसी एक व्यक्ति या किसी ख़ास शॉट को दोष नहीं दे सकते। दोष सबका है। मैंने कभी किसी एक व्यक्ति को दोष नहीं दिया और आगे भी ऐसा नहीं करूंगा।” गंभीर के नेतृत्व में भारत ने 18 टेस्ट मैचों में से 10 में हार का सामना किया है, जिसमें पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ और अब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू मैदान पर मिली हार भी शामिल है।
गंभीर के नेतृत्व में भारत अब तक घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांच टेस्ट हार चुका है। पिछले 66 वर्षों में यह पहला अवसर है जबकि भारतीय टीम सात महीनों के अंतराल में पांच टेस्ट हार गई। यह तीसरा अवसर है जबकि किसी टीम ने भारत का उसकी धरती पर सूपड़ा साफ किया। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका ने 2000 में 2-0 से जबकि पिछले साल न्यूजीलैंड ने 3-0 से सीरीज जीती थी। इस पराजय से भारत की वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को भी करारा झटका लगा है।


















