रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच कांग्रेस अब अपने बूथ संगठन की जमीनी स्थिति परखने की तैयारी में है। प्रदेश में गठित बूथ कमेटियों की सूची में दर्ज नाम वास्तव में संबंधित क्षेत्र में मौजूद हैं या नहीं और कमेटियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं या सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, इसकी जांच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) कराएगी।
राष्ट्रीय नेतृत्व ने कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी से मिले बूथ, वार्ड, ग्राम, मंडल, ब्लॉक और जिला स्तर के पदाधिकारियों के डाटा का नेशनल कनेक्ट सेंटर के माध्यम से क्रॉस वेरिफिकेशन कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर संबंधित पदाधिकारियों और समितियों का भौतिक सत्यापन भी किया जा सकता है। संगठन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यह प्रक्रिया सितंबर से शुरू होने के संकेत हैं।
पहले 30 फीसदी बूथ कमेटियों की समीक्षा
एआईसीसी ने वर्ष 2026 को संगठन सृजन वर्ष घोषित किया है। सभी राज्यों को साल के अंत तक संगठन के विभिन्न स्तरों पर कमेटियों के गठन और पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में ग्राम, बूथ और वार्ड समितियों के गठन का दावा किया है। जिला, ब्लॉक और मंडल स्तर की कार्यकारिणियों से संबंधित डाटा भी राष्ट्रीय नेतृत्व को सौंपा जा चुका है।
सूत्रों के मुताबिक करीब 30 फीसदी बूथ कमेटियों की प्रदेश कांग्रेस स्तर पर समीक्षा और सुधार की प्रक्रिया अभी बाकी है। इसी बीच एआईसीसी अब उपलब्ध सूची की वास्तविकता भी जांचना चाहती है। सत्यापन के दौरान यह देखा जाएगा कि सूची में दर्ज पदाधिकारी संबंधित क्षेत्र में मौजूद हैं या नहीं, वे संगठन की गतिविधियों में सक्रिय हैं या नहीं और बूथ कमेटी वास्तव में जमीन पर काम कर रही है या नहीं।
पुरानी शिकायतों से लिया सबक
कांग्रेस के सामने पिछले विधानसभा चुनाव से पहले भी बूथ कमेटियों को लेकर कई शिकायतें आई थीं। कुछ विधानसभा क्षेत्रों में कमेटियों में शामिल पदाधिकारी क्षेत्र छोड़कर जा चुके थे। कई स्थानों पर पदाधिकारियों की मौजूदगी और सक्रियता की पुष्टि नहीं हो पाई थी।
संगठन के स्तर पर ऐसी शिकायतें भी सामने आई थीं कि कुछ बूथ कमेटियां केवल कागजों पर गठित थीं। इन अनुभवों से सबक लेते हुए कांग्रेस इस बार चुनावी रणनीति को बूथ स्तर तक ले जाने से पहले अपने संगठन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना चाहती है।
हाल ही में दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कामकाज की समीक्षा के दौरान प्रदेश संगठन की ओर से विभिन्न स्तर की कमेटियों का विस्तृत डाटा राष्ट्रीय नेतृत्व को सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
सितंबर से शुरू हो सकता है सत्यापन
संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार बूथ कमेटियों के सत्यापन की प्रक्रिया सितंबर से शुरू की जा सकती है। नेशनल कनेक्ट सेंटर के माध्यम से कमेटियों में दर्ज पदाधिकारियों से संपर्क कर उनकी जानकारी की पुष्टि की जाएगी।
जहां जरूरत महसूस होगी, वहां संबंधित क्षेत्र में पदाधिकारियों की मौजूदगी, बूथ कमेटी की सक्रियता और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भागीदारी की भी पड़ताल की जा सकती है।
कांग्रेस का उद्देश्य चुनाव के दौरान बूथ स्तर पर संगठन की वास्तविक स्थिति को लेकर किसी तरह की शिकायत या भ्रम की स्थिति से बचना है। पार्टी के लिए अब चुनौती केवल कमेटियों की सूची तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें चुनाव तक सक्रिय बनाए रखना होगी।
बूथ तैयारियों में भाजपा से पिछड़ने की चुनौती
संगठनात्मक सक्रियता के मामले में सत्ताधारी भाजपा फिलहाल कांग्रेस से आगे नजर आ रही है। कांग्रेस ने निचले स्तर तक समितियों के गठन का दावा किया है, लेकिन इन समितियों को लगातार सक्रिय बनाए रखना उसके सामने बड़ी चुनौती है। विधानसभावार पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां भी अभी पूरी तरह तय नहीं हो पाने की बात सामने आ रही है।
इसके विपरीत भाजपा जिला स्तर से लेकर मतदान केंद्र तक संगठन को विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए लगातार सक्रिय रखे हुए है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं से संपर्क, मतदाताओं तक पहुंच और उनकी प्रोफाइल तैयार करने जैसे काम भी किए जा रहे हैं।


















