रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने होटल में ठहरने के दौरान आभूषण चोरी होने के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए रायपुर के वी डब्ल्यू कैन्यन होटल प्रबंधन को पीड़ित ग्राहक को 2.37 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग के पहले के फैसले को निरस्त करते हुए होटल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था में कमी और सेवा में लापरवाही को जिम्मेदार माना है।
आयोग के आदेश के अनुसार होटल प्रबंधन को 60 दिनों के भीतर 2,37,500 रुपये का भुगतान करना होगा। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मामला राजस्थान के बीकानेर निवासी नरजत सिंह सेठिया से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार वह अपने परिवार के साथ रायपुर स्थित वी डब्ल्यू कैन्यन होटल में ठहरे थे। इस दौरान उनके परिवार के 2,02,500 रुपये मूल्य के आभूषण होटल के कमरे से चोरी हो गए। पीड़ित ने होटल प्रबंधन पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
होटल प्रबंधन ने अपने बचाव में कहा कि प्रत्येक कमरे में लॉकर उपलब्ध था, लेकिन शिकायतकर्ता ने उसका उपयोग नहीं किया। साथ ही एफआईआर देर से दर्ज कराने और खरीद संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने का भी हवाला दिया।
पहले जिला उपभोक्ता आयोग, रायपुर ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए शिकायत खारिज कर दी थी। हालांकि, राज्य उपभोक्ता आयोग ने 31 जुलाई 2026 को दिए अपने फैसले में जिला आयोग का आदेश पलट दिया।
राज्य आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(7) के तहत सेवा का लाभ लेने वाला व्यक्ति भी उपभोक्ता की श्रेणी में आता है। आयोग ने माना कि होटल के बंद कमरे से आभूषण चोरी होना होटल की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमी और सेवा में लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है।
आयोग ने एफआईआर दर्ज कराने में हुई देरी को भी शिकायतकर्ता के खिलाफ आधार मानने से इनकार करते हुए कहा कि पीड़ित ने पहले होटल प्रबंधन को घटना की जानकारी दी और उनकी आंतरिक जांच का इंतजार किया था। इसलिए देरी को शिकायत खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
अपने आदेश में आयोग ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि होटल में ठहरने वाला अतिथि केवल आतिथ्य ही नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा और संपत्ति की सुरक्षा का भी भरोसा लेकर आता है। उसे अपने सामान की चिंता में नहीं, बल्कि सुरक्षित और आरामदायक वातावरण में रहने का अधिकार है।


















