रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी खरीफ सीजन 2026 से पहले ही रासायनिक उर्वरकों की कमी की आशंका बढ़ने लगी है। राज्य में इस वर्ष कुल 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग का अनुमान लगाया गया है, लेकिन सहकारी क्षेत्र में अब तक लक्ष्य के मुकाबले केवल 51 प्रतिशत खाद का ही भंडारण हो पाया है। दूसरी ओर अधिकांश सहकारी समितियों में किसानों को खाद वितरण भी शुरू नहीं हो सका है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार खरीफ सीजन के लिए यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एनपीके 2.5 लाख, एसएसपी 2 लाख और एमओपी 80 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता आंकी गई है। वहीं मार्कफेड के माध्यम से सहकारी क्षेत्र में 10 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके मुकाबले अब तक केवल 5.10 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडारण हो सका है।
सबसे अधिक संकट डीएपी खाद को लेकर बताया जा रहा है। इस वर्ष खरीफ सीजन में करीब 1.50 लाख मीट्रिक टन डीएपी की कमी अनुमानित है। सहकारी क्षेत्र में डीएपी का लक्ष्य 2.25 लाख मीट्रिक टन रखा गया है, लेकिन अब तक केवल 61,794 मीट्रिक टन का ही भंडारण हो पाया है, जो लक्ष्य का करीब 27 प्रतिशत है। वहीं यूरिया के लिए 4.78 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले 2.41 लाख मीट्रिक टन भंडारण किया गया है।
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प्रदेश की कई सहकारी समितियों में कहीं यूरिया तो कहीं डीएपी पूरी तरह खत्म होने की स्थिति में है। किसानों को मई माह से ई-उर्वरक पोर्टल के जरिए खाद वितरण शुरू करने का दावा किया गया था, लेकिन पोर्टल अब तक प्रारंभ नहीं हो सका है। इसके चलते वितरण व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
राज्य सरकार अब किसानों का पंजीयन फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से कर रही है। नई ई-उर्वरक वितरण प्रणाली के तहत किसानों को उनके वास्तविक रकबे और फसल के अनुसार अनुशंसित खाद उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए एकीकृत किसान पोर्टल, भुईयां और एग्रीस्टैक पोर्टल को जोड़ा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डीएपी और यूरिया की कमी की पूर्ति के लिए एनपीके, एसएसपी और नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि प्रदेश में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को लेकर किसानों में जागरूकता की कमी है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, स्प्रे के माध्यम से उपयोग होने वाले नैनो उर्वरक पारंपरिक खाद की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।
इस बीच रामविचार नेताम ने खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अधिक कीमत पर खाद बेचने या अवैध भंडारण करने वालों को जेल तक भेजा जाएगा। मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हुई है, लेकिन सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
वहीं कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने दावा किया है कि राज्य में खाद का अग्रिम भंडारण और वितरण कार्य जारी है तथा जल्द ही ऑनलाइन वितरण प्रणाली भी शुरू कर दी जाएगी।



















