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रायपुर में दिल दहला देने वाली वारदात की पूरी कहानी: सनकी बाउंसर ने दो सालियों को गोलियों से भूना, दोनों की मौत

रायपुर। राजधानी के मोवा बाजार इलाके में मंगलवार की रात एक सिरफिरे बाउंसर ने खूनी खेल खेला। अपनी 16 माह की बच्ची से मिलने के विवाद में आरोपी ने अपनी दो सालियों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में बड़ी साली की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छोटी बहन ने बुधवार सुबह अस्पताल में दम तोड़ दिया।

विवाद, हत्या और फिर बगल में बैठकर इंतजार

घटना मंगलवार रात करीब 10 बजे की है। आरोपी जीतेंद्र वर्मा अपनी ससुराल पहुंचा और अपनी पत्नी खिलेश्वरी व बेटी से मिलने की जिद करने लगा। जब उसे बताया गया कि पत्नी घर पर नहीं है, तो वह भड़क गया।

  1. पहली हत्या: हॉल में सो रही बड़ी साली गीतांजलि (26) से बहस के बाद आरोपी ने अपनी कमर से पिस्टल निकाली और उसके माथे पर सटाकर गोली मार दी।
  2. शव के पास बैठा रहा: हत्या करने के बाद आरोपी भागने के बजाय कुछ देर तक शव के पास ही बैठा रहा।
  3. दूसरी हत्या: गोलियों की आवाज सुनकर जब छोटी साली दुर्गेश्वरी नीचे आई, तो आरोपी ने उससे भी विवाद किया और उसकी गर्दन पर फायर कर दिया। बुधवार सुबह इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

मानसिक रूप से अस्थिर था आरोपी, फिर भी पास थी बंदूक

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी जीतेंद्र पिछले दो साल से अंबेडकर अस्पताल में अपना मानसिक इलाज करा रहा था। नौकरी छूटने के बाद वह नशे का आदी हो चुका था और अक्सर हिंसक व्यवहार करता था।

  • लाइसेंस पर सवाल: आरोपी के पास 2020 में बना गन लाइसेंस था, जो 2026 तक वैध है। मानसिक रूप से अस्थिर होने के बावजूद उसके पास हथियार का होना सुरक्षा व्यवस्था और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
  • प्रशासन की सख्ती: इस घटना के बाद अब पुलिस जिले के सभी गन लाइसेंसों की नए सिरे से समीक्षा करेगी। अस्वस्थ और आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।

पत्नी का आरोप: पुलिस ने समय रहते नहीं सुनी गुहार

मृतकों की बड़ी बहन और आरोपी की पत्नी खिलेश्वरी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने बताया कि आरोपी ने 5-6 दिन पहले भी उस पर बंदूक तानी थी, जिसकी शिकायत मोवा थाने में की गई थी। लेकिन पुलिस ने इसे ‘पारिवारिक विवाद’ बताकर टाल दिया। यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद आज दोनों बहनों की जान बच जाती।

20 मिनट का वो खूनी मंजर

मृतकों की मां सावित्री बाई इस पूरी घटना की चश्मदीद हैं। उनकी आंखों के सामने ही दामाद ने उनकी दो बेटियों को मौत के घाट उतार दिया। मां चीखती रही, गुहार लगाती रही, लेकिन आरोपी पर खून सवार था। पोस्टमार्टम के बाद बुधवार शाम को दोनों शवों को उनके पैतृक गांव ले जाया गया, जहां पूरे गांव में मातम का माहौल है।

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