पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट ने भारत समेत तमाम देशों में स्थिति को विकट कर दिया है। रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता से तेल बचाने, WFH समेत सात अपील कीं। पीएम मोदी की अपील का समर्थन करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी लोगों से इन पर ध्यान देने का अनुरोध किया। सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट का सुलझना अभी दूर की बात है। ऐसे में सभी भारतीयों को प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर ध्यान देना चाहिए और जितना हो सके उतना सहयोग करना चाहिए।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भले ही भारत जैसे देश पश्चिम एशिया के हालात के लिए जिम्मेदार नहीं है, लेकिन इसका असर हमारे ऊपर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया अभी बहुत ही ज्यादा उथल-पुथल वाले दौर से गुजर रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “पश्चिम एशिया में युद्ध विराम अभी दूर की कौड़ी लग रहा है। ऐसे में हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह सरकार द्वारा किए जा रहे इस प्रयास में अपनी भूमिका को निभाए। मैं आप सभी से प्रधानमंत्री की राष्ट्र के नाम की अपील पर ध्यान देने का अनुरोध करता हूं। अपने घरों और व्यवसायों में जितना हो सके उतना अच्छा करने की कोशिश करें।”
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री की तरह से यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब कल रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से तेल को बचाने और सोने को कम खरीदने समेत सात अपील की थीं। प्रधानमंत्री ने तर्क दिया था कि इससे भारत के विदेश मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सकता है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील करते हुए वर्फ फ्रॉम होम को प्राथमिकता देने की बात कही है। इसके अलावा सोने की खरीद बंद करने, विदेश यात्रा न करने, नैचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देने समेत कुल 7 अपील प्रधानमंत्री मोदी की हैं। मुख्य तौर पर उनकी अपील ईंधन के समझदारी से इस्तेमाल करने को लेकर है। ईरान में चल रही जंग के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई के अहम गलियारे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही ठप पड़ी है। ऐसी स्थिति में दुनिया भर में तेल का संकट पैदा हो रहा है। पाकिस्तान, श्रीलंका समेत कई पड़ोसी देशों ने तो मार्च में ही कई पाबंदियां लगा दी थीं ताकि तेल की किल्लत हद से ज्यादा न बढ़े।
भारत का स्ट्रेटेजिक रिजर्व काफी बड़ा है और इसके चलते ही अब तक देश में कोई खास किल्लत नहीं देखी गई है। लेकिन अब पीएम मोदी ने ईंधन सप्लाई के संकट को देखते हुए जनता से 7 अपीलें की हैं। उनका कहना है कि इससे हम संकट से निपट सकेंगे और देश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ेगा। भले ही ईरान युद्ध की 28 फरवरी को शुरुआत हुई थी और पीएम मोदी ने वर्क फ्रॉम होम वाली अपील अब जाकर की है, लेकिन दुनिया के 70 देश पहले ही ऐसी नीति अपना चुके हैं। इन देशों में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान, श्रीलंका, वियतनाम, आदि शामिल हैं। इसके अलावा इंडोनेशिया और फिलिपींस भी ऐसी नीति लागू कर चुके हैं। इटली, स्पेन और जर्मनी भी इन देशों में शामिल हैं।
चीन और जापान जैसे देशों में भी आंशिक तौर पर यह नीति लागू है। इसका मकसद यही है कि बेहद जरूरी कामों के लिए पेट्रोलियम की उपलब्धता को बनाए रखा जाए और किसी भी तरह के संकट को टाला जा सके। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ट्रैकर के अनुसार अब तक कुल 70 देश ऐसी नीति लागू कर चुके हैं। इनमें एशिया के बाहर के मुल्क भी शामिल हैं, जैसे- मेक्सिको, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि। इन देशों ने जनता को जागरूक करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं तो वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी कुछ प्रयास हुए हैं।
एसी पर भी कई देशों ने लागू की है नीति
जनता को जागरूक करने की कोशिश करते हुए वर्फ फ्रॉम होम की नीति लागू हुई है। एसी के लिए टेंपरेचर लिमिट सेट की गई है। इसके अलावा बच्चों की ऑनलाइन क्लास, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा कुछ देशों में निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए सख्त पॉलिसी भी लाई गई है। वहीं सरकारी स्तर पर आधिकारिक दौरे कम हुए हैं। ईंधन की कीमतें नियंत्रित की गई हैं। एनर्जी टैक्स घटाया गया है। इस तरह कीमतों को एक स्तर से ज्यादा नहीं बढ़ने दिया है। वहीं जनता को भी जागरूक करने के प्रयास हो रहे हैं और वर्क कल्चर में कुछ तब्दीली की जा रही है ताकि ईंधन की बचत हो सके।



















