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एक माह में 230 एकड़ रकबा का समर्पण, सरकार ने बचाए डेढ़ करोड़

रायपुर/ बिलासपुर। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के एक माह में जिले के 42 हजार 92 किसानों से 2 लाख 4 हजार 650 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। खास बात यह है कि इस बार प्रशासन ने जिले के किसानों से 93 हेक्टेयर यानी लगभग 230 एकड़ का रकबा समर्पण कराया गया, जिससे सरकार ने 1 करोड़ 49 लाख रुपए की बचत की। सीधे शब्दों में कहा जाए तो प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी के लालच में किसान छोटे-छोटे रकबे या गैर कृषि जमीन के नाम पर धान बेचते थे। इस पर सरकार ने अंकुश लगाकर बचत करने का प्रयास किया है। धान का समर्थन मूल्य प्रति एकड़ 21 क्विंटल है और सरकार प्रति क्विंटल 31 सौ रुपए में खरीद रही है। अच्छी खासी राशि मिलने के कारण किसान अपने पूरे रकबे का धान बेचने के फिराक में है। कोटा पूरा करने के लिए किसान एक-एक डिसमिल भूमि के एवज में धान बेचने जूटे हैं। इससे उत्पादन से अधिक मात्रा में धान की बिक्री की शिकायत मिलती है। इसको देखते हुए शासन ने प्रशासन को छोटे-छोटे रकबे और उत्पादन से अधिक धान खपाने वाले किसानों पर रोक लगाने को कहा है। इसके लिए शासन ने जिला प्रशासन को किसानों से रकबा समर्पण कराने को कहा है। ऐसी स्थिति में प्रशासनिक अमला समितियों में रकबा समर्पण की अपील के साथ-साथ अभियान भी चला रहा है। इसके परिप्रेक्ष्य में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर जिला प्रशासन द्वारा किसानों से रकबा समर्पण की अपील की जा रही है। खरीदी शुरू हुए एक माह बीत जाने के बाद सामने आए आंकड़े इस पहल की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। जिले में अब तक किसानों से 93 हेक्टेयर, यानी लगभग 230 एकड़ का रकबा समर्पण कराया जा चुका है। यदि प्रति एकड़ औसतन 21 क्विंटल धान की गणना की जाए, तो लगभग 4,830 क्विंटल धान की खरीदी से बचाव हुआ है। इस तरह सरकार को 1 करोड़ 49 लाख 73 हजार रुपए की सीधी बचत हुई है।

खरीदी और उठाव पर एक नजर

जिले में कुल 1,32,675 किसान पंजीकृत हैं, लेकिन अब तक केवल 42,092 किसानों ने ही धान बेचा है, जो कुल का मात्र 32 प्रतिशत है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अभी भी बड़ी संख्या में किसान खरीदी प्रक्रिया से बाहर हैं। अब तक जिले में कुल 2,04,650 मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 87 प्रतिशत है। समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान की कुल राशि 484.81 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह आंकड़े जिले में खरीदी की व्यापकता और किसानों की भागीदारी को दर्शाते हैं। धान के उठाव की स्थिति पर नजर डालें तो अब तक 1,31,792 मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है। जारी किए गए डीओ के विरुद्ध उठाव का प्रतिशत 65 प्रतिशत, जबकि कुल खरीदी के विरुद्ध उठाव 64 प्रतिशत रहा है।

अनावश्यक खरीदी और सरकारी धन की बचत

रकबा समर्पण जैसी पहल से न केवल अनावश्यक खरीदी पर रोक लगी है, बल्कि सरकारी धन की भी बचत होगी। आने वाले दिनों में भी किसानों से रकबा समर्पण करने की अपील करेंगे। ताकि खरीदी व्यवस्था अधिक पारदर्शी हो।

अमृत कुजूर, खाद्य नियंत्रक

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