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कांग्रेस के निष्क्रिय मोर्चा-प्रकोष्ठों की होगी सर्जरी, सक्रिय नेताओं को मिल सकती है जिम्मेदारी

एआईसीसी के निर्देश के बाद पीसीसी ने शुरू की कवायद, वरिष्ठ नेताओं से रायशुमारी के बाद तैयार होगा प्रस्ताव

रायपुर। कांग्रेस संगठन में लंबे समय से निष्क्रिय चल रहे मोर्चा, प्रकोष्ठ और विभागों में जल्द बदलाव की संभावना है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के निर्देश के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठनात्मक स्तर पर बदलाव की कवायद शुरू कर दी है। लंबे समय से गतिविधियों से दूर पदाधिकारियों को हटाकर सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी है।

संगठन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मोर्चा, प्रकोष्ठ और विभागों की निष्क्रियता तथा उनकी गतिविधियों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों को एआईसीसी ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस से ऐसे पदाधिकारियों को चिन्हित कर नए नामों का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। प्रस्ताव तैयार करने से पहले प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से रायशुमारी की जाएगी।

भूपेश बघेल से दीपक बैज ने की रायशुमारी

संगठनात्मक बदलाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी चर्चा की है। भूपेश बघेल के निवास पर हुई दो घंटे से अधिक की बैठक में विभिन्न मोर्चा, प्रकोष्ठ और विभागों के निष्क्रिय अध्यक्षों के नामों पर चर्चा हुई। साथ ही नई जिम्मेदारी के लिए सक्रिय नेताओं के नामों को लेकर भी रायशुमारी की गई।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद ऐसे नेताओं के नाम जुटाए जा रहे हैं, जो लगातार पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं और जमीनी स्तर पर संगठन के लिए काम कर रहे हैं। इन नामों पर व्यापक सहमति बनाने के बाद प्रस्ताव एआईसीसी को भेजा जाएगा।

कई संगठनों की जिलों में भी नहीं बनी पूरी टीम

कांग्रेस के कुछ चुनिंदा विभाग और प्रकोष्ठ ही लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। इनमें से कुछ की टीमें जिला स्तर पर भी नियमित गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इसके विपरीत अधिकांश मोर्चा, प्रकोष्ठ और विभागों की जिलों में पूरी टीम तक गठित नहीं हो पाई है।

संगठनात्मक ढांचे के मुताबिक इन इकाइयों को ब्लॉक और वार्ड स्तर तक समितियां बनाकर पार्टी की गतिविधियों को मजबूत करना था, लेकिन कई जगह ऐसा नहीं हो पाया। प्रदेश अध्यक्षों के नियमित दौरे और संगठनात्मक गतिविधियां भी सीमित रहने की शिकायतें सामने आई हैं। जिलों में संगठन की निष्क्रियता को लेकर सहप्रभारियों के स्तर पर भी शिकायतें की गई हैं। पार्टी के प्रदेश प्रभारी महासचिव सचिन पायलट को भी इस स्थिति से अवगत कराया गया है।

प्रदेश कार्यकारिणी के रिक्त पदों पर नियुक्ति के संकेत नहीं

प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी में लंबे समय से खाली पड़े उपाध्यक्ष और महामंत्री के पदों पर फिलहाल नियुक्ति के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। करीब तीन साल से रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। इसके बजाय मौजूदा प्रदेश पदाधिकारियों को ही जिलों का प्रभार सौंपने पर जोर दिया जा रहा है।

वर्तमान में कार्यरत उपाध्यक्ष, महामंत्री और सचिवों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि जिला प्रभारियों को लेकर संगठन के भीतर पहले से विवाद की स्थिति रही है, जिसका असर संगठनात्मक गतिविधियों पर भी पड़ा है।

चुनावी तैयारी से पहले सक्रिय टीम पर जोर

कांग्रेस अब आगामी चुनावी तैयारियों से पहले संगठन को सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाकर ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी देने की कोशिश है, जो लगातार पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय हैं। माना जा रहा है कि एआईसीसी को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में वरिष्ठ नेताओं की राय को विशेष महत्व दिया जाएगा।

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