Parliament Special Session 2026 LIVE: बजट सत्र का विस्तार करते हुए सरकार ने तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया है, जो गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) को शुरू हो गया। इसमें तीन मुख्य विधेयक संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए। आज लोकसभा में वोटिंग होनी है।
सरकार ने कहा है कि इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण के कार्यान्वयन में तेजी लाना है। मंगलवार (14 अप्रैल, 2026) को केंद्र सरकार ने सांसदों के बीच ड्राफ्ट बिल बांटे। ये बिल महिलाओं के लिए आरक्षण कानून ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने और नए सिरे से परिसीमन करने से जुड़े हैं।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण देने के लिए जिससे लड़ना पड़े, लड़ेंगे लेकिन उनका हक दिलाकर रहेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष हमेशा हमारे द्वारा लाए गए सभी बिल और कानून का विरोध किया. उन्होंने सभी उन बिल को गिनाए, जिनका विरोध विपक्ष किया गया. हमने 370 हटाया इन्होंने विरोध किया. हमने 370 हटाया इन्होंने विरोध किया. राम मंदिर बनाया इन्होंने विरोध किया. तीन तलाक हटाया इन्होंने विरोध किया. सर्जिकल स्ट्राइक किया इन्होंने विरोध किया.
गृहमंत्री अमित शाह नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा को संबोधित कर रहे हैं. इस अवसर पर उन्होंने विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि विपक्ष का ये विरोध इस बिल के लागू होने से नहीं बल्कि महिला के आरक्षण के विरोध में है. साथ ही उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2029 तक महिला सशक्तिकरण का वादा पूरा करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं वादा करता हूं कि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ ही पूरा होगा.
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ एनडीए के सामने संख्या बल की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. मौजूदा स्थिति में एनडीए के पास लोकसभा में आवश्यक दो तिहाई बहुमत नहीं है, जिससे इस अहम संवैधानिक संशोधन बिल को पास कराना विपक्ष के सहयोग या अनुपस्थिति (एब्सटेंशन) पर निर्भर हो गया है. लोकसभा में एनडीए के पास कुल 293 सांसद हैं, जो सदन का करीब 54 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं. इसके अलावा कुछ निर्दलीय और छोटे दलों के सदस्य भी हैं, जिनकी भूमिका इस पूरे गणित में निर्णायक बन सकती है. नियमों के अनुसार, किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है. यदि सभी 540 सदस्य उपस्थित रहते हैं, तो यह आंकड़ा 360 तक पहुंच जाता है.
ऐसे में एनडीए को या तो विपक्षी दलों का समर्थन जुटाना होगा या फिर बड़ी संख्या में विपक्षी सांसदों को मतदान से दूर रखना होगा. उदाहरण के तौर पर यदि 30 सांसद मतदान से अनुपस्थित रहते हैं, तो कुल संख्या घटकर 510 हो जाएगी और दो तिहाई बहुमत 340 रह जाएगा. इसी तरह 60 सांसदों के अनुपस्थित रहने पर यह आंकड़ा 320 और 90 सांसदों के अनुपस्थित रहने पर 300 तक आ सकता है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बिल को पास कराने के लिए समाजवादी पार्टी (37 सांसद), तृणमूल कांग्रेस (28 सांसद) और डीएमके (22 सांसद) जैसे प्रमुख विपक्षी दलों में से कम से कम दो दलों का समर्थन या उनकी अनुपस्थिति जरूरी होगी. कांग्रेस के पास भी 98 सांसद हैं, जो इस समीकरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं.




















