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छत्तीसगढ़ में 595 प्रोफेसरों की भर्ती छह साल बाद भी अधूरी, आवेदन से दस्तावेज सत्यापन तक पहुंची प्रक्रिया ठप

रायपुर। प्रदेश के शासकीय कॉलेजों में सैकड़ों प्राध्यापकों (प्रोफेसरों) के पद वर्षों से रिक्त हैं, लेकिन 595 पदों पर शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया छह साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। आवेदन, त्रुटि सुधार और दस्तावेज सत्यापन जैसी सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से अभ्यर्थियों में निराशा है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

2021 में निकला था भर्ती विज्ञापन
उच्च शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर सीजीपीएससी ने 8 सितंबर 2021 को करीब 30 विषयों में 595 प्राध्यापक पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसके लिए 12 अक्टूबर 2021 तक ऑनलाइन आवेदन और 22 अक्टूबर 2021 तक त्रुटि सुधार का अवसर दिया गया था। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन भी किए।

हालांकि आवेदन प्रक्रिया के दौरान ही उच्च शिक्षा विभाग की ओर से भर्ती स्थगित करने का प्रस्ताव भेजे जाने पर आयोग ने 7 अक्टूबर 2021 को भर्ती प्रक्रिया रोक दी और बाद में दोबारा आवेदन लेने की बात कही।

सरकार बदली तो जगी उम्मीद

दिसंबर 2023 में राज्य में सरकार बदलने के बाद अभ्यर्थियों को उम्मीद जगी, क्योंकि भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में भी प्राध्यापक भर्ती का उल्लेख किया था। इसके बाद सीजीपीएससी ने शुद्धिपत्र जारी कर भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू की और 8 अगस्त से 6 सितंबर 2024 तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए। अभ्यर्थियों को 13 सितंबर 2024 तक त्रुटि सुधार का अवसर भी दिया गया।

दस्तावेज सत्यापन के बाद भी नहीं बढ़ी प्रक्रिया

भर्ती प्रक्रिया के तहत दस्तावेज सत्यापन भी कराया गया। कुछ अभ्यर्थियों के आवेदन में तकनीकी त्रुटियों के कारण आयोग ने 20 दिसंबर 2024 को एक और शुद्धिपत्र जारी कर 27 दिसंबर 2024 तक संशोधन का अवसर दिया। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन सहित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो गईं।

इसके बावजूद पिछले कई महीनों से भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ठप है। न तो परीक्षा और न ही चयन प्रक्रिया को लेकर कोई नई सूचना जारी की गई है।

कम आवेदन और पात्रता बनी वजह?

सूत्रों के अनुसार, 595 पदों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम आवेदन प्राप्त हुए। वहीं भर्ती के लिए पीएचडी और न्यूनतम 10 वर्ष का शिक्षण अनुभव अनिवार्य होने के कारण पर्याप्त पात्र अभ्यर्थी नहीं मिल सके। इसी वजह से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

उधर उच्च शिक्षा विभाग इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का हवाला दे रहा है, जबकि सीजीपीएससी ने भी अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। ऐसे में वर्षों से भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने की राह देख रहे हैं।

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